रेलवे ट्रैक के 2.5 लाख से अधिक जोड़ पट्टियों का हो रहा है ऑयलिंग एवं ग्रीसिंग

जबलपुर दर्पण। रेलवे बोर्ड द्वारा शीतकालीन मौसम में रेल गाड़ियों के सचारु रूप से संचालन के लिए शीतकालीन मौसम से पहले दिशा-निर्देश जारी किया गया है। रेलवे बोर्ड द्वारा निर्देशित किया गया है कि शीतकालीन के दौरान रेलवे ट्रैक की सभी जोड़ पट्टियों की जाँच करके उनका लुब्रिकेशन करना, ट्रैक की डी-स्ट्रेसिंग करना एवं सभी एलडब्लूआर की मिसिंग फिटिंग जैसे महत्वपूर्ण कार्य पूर्ण करना है। गौरतलब है कि पश्चिम मध्य रेल ने शीतकालीन मौसम के पहले के कार्यों को सभी दिशाओं में शुरू कर दिया है।
फिश प्लेटों की ऑइललिंग और ग्रीसिंग, रेलवे ट्रैक के सभी सामान्य फिश प्लेट एवं जोगल फिश प्लेट जॉइंट्स की गहन तरीके से जाँच करके उसमें ऑइललिंग और ग्रीसिंग का कार्य शरू कर दिया है। इस कार्य को शीतकालीन मौसम से पहले पूर्ण कर लिया जाएगा। जिसके अंतर्गत 70 हज़ार जोड़ो के सामान्य फिश प्लेट एवं 175 हज़ार जोड़ो के जोगल फिश प्लेट में ऑइललिंग और ग्रीसिंग का कार्य किया जा रहा है। जो कि अंतिम चरण में है। रेलवे ट्रेक में ऑइललिंग एवं ग्रीसिंग के दौरान सभी बोल्ट और पट्टियों को जाँच कर उसे सही तरीके से फीटिंग का कार्य किया जाता है। जिससे शीतकालीन मौसम में ट्रैक के दबाव के समय रेल के खिंचाव में ट्रैक संरक्षित रहे।
डिस्ट्रेसिंग, भारतीय रेल एवं पश्चिम मध्य रेल पर स्टेशन से स्टेशन के बीच एलडब्लूआर (लॉन्ग वेल्डड रेल) पूरी तरह से बिछी हुई है और लंबे-लंबे रेल ट्रैक होने से शीतकालीन के दौरान खिंचाव उत्पन्न होना स्वाभाविक है। इस खिंचाव को डीस्ट्रेस करना पड़ता है ताकी शीतकालीन के समय रेलवे में खिंचाव उत्पन्न नहीं हो और रेल संरक्षित रहे। जिसके अंतर्गत पमरे द्वारा 150 किमी का डीस्ट्रेस कार्य तेजी से किया जा रहा है।
पेट्रोलिंग, शीतकालीन के लिए पेट्रोलिंग की तैयारी की जा रही है। जिसके अंतर्गत पश्चिम मध्य रेल के सभी रेलखण्डों पर शीतकालीन की पेट्रोलिंग की जाएगी। इस प्रकार पमरे में कुल 1700 से अधिक पेट्रोलमैनों को पेट्रोलिंग करने के लिए लगाया जायेगा। जो कि रात्रि 11 बजे से सुबह 07 बजे तक सभी पेट्रोलिंग उपकरणों तथा ट्रैक को सुरक्षित रखने के लिए औजार के साथ ट्रैक की निगरानी करेंगे। इसके साथ सभी पेट्रोलमैन को जीपीएस ट्रैकर दिया जाएगा जिससे पेट्रोलिंग के समय इन पर निगरानी रखी जा सके।आपातकालीन स्थिति में इसी ट्रैकर की मदद से मोबाइल फोन द्वारा पेट्रोलमैन से कम्युनिकेशन किया जा सकता है।
पश्चिम मध्य रेल द्वारा शीतकालीन मौसम से पहले समय-समय पर ट्रैकमैनों को प्रशिक्षण भी दिया जाता है जिससे ट्रैक पर संरक्षित परिचालन होता रहे। शीतकालीन मौसम के लिए पूर्व से ही पश्चिम मध्य रेल सभी उपाय ले रहा है।



