भागवत श्रवण मात्र से जीवन की वैतरणी पार हो जाती है: संत राधेश्याम महाराज

जबलपुर दर्पण। नर्मदा पूजन कर निकली कलश यात्रा
पीत वस्त्र धारी महिलाओ और कन्याओ ने नर्मदा पूजन कर जल कलशो में रामलला का आवाहन किया। कलश यात्रा के साथ भागवत कथा सप्ताह का श्रीगणेश हुआ। कलश यात्रा मे ध्वजो के ढोल, बैंड बाजो के साथ भजन कीर्तन करते भक्त मंडल रहे।
आषाढी कार्तिकी वारी महामंडल, महाराष्ट्र ब्रह्मवृन्द समाज जबलपुर के संयोजन मे ज्ञानेश्वर माऊली सभागृह कुशावर्तेश्वर शिव मंदिर जिलहरी घाट जबलपुर मे आज से 28 अक्टूबर तक दोपहर में श्रीमद्भागवत कथा सप्ताह का आयोजन किया गया है ।कथा के प्रथम दिन कलश यात्रा एवं गणेश पूजन के साथ श्री रामलला मंदिर से कुशावर्तेश्वर शिव मंदिर नर्मदा तट जिलहरी घाट मे संपन्न हुई। भागवत श्रवण मात्र से पूर्व जन्म के पुण्यो का उदय होता है। कलिकाल मे भागवत जीवन की वैतरणी को भाव सागर से पार लगा देती है। नर्मदा तट पर श्रीहरि नारायण के कार्तिक मास मे नाम संकीर्तन और भागवत श्रवण का बहुत महत्व है, उक्त उदगार ओरछा से पधारे भागवताकार कथावाचक संत राधेश्याम जी महाराज के मुखारविंद से भागवत कथा प्रारंभ मे कहे। कलश यात्रा में महाराज जी का स्वागत पूर्व महापौर सदानंद गोडबोले ,संतोष गोडबोले, पं. मनोज तेलंग, नीलेश दाभोलकर, स्वप्निल गरे, निर्णय काले, जयेश टाकलकर, सन्दीप परांजपे, आनंद बापट, एम एस शर्मा, देवेन्द्र साहू सहित श्रृध्दालुओ ने किया।



