कविताओं से नशा मुक्ति के लिए हिंदी लेखिका संघ का आनलाइन जागरुकता कार्यक्रम संपन्न

जबलपुर दर्पण। दिन प्रतिदिन, विभिन्न प्रकार के नशे का चलन परिवार, समाज और राष्ट्र के लिए घातक होता जा रहा है। युवा वर्ग इसकी चपेट में आकर विनाश की कगार पर खड़ा है। बीड़ी, तंबाकू और शराब। घटने लगता है जिंदगी का हिसाब बाहर बाहर धन बर्बाद, अंदर अंदर तन बर्बाद। शराब इंसान को बेहया बनाती है, ये जुर्म करना रोज़ सिखाती है ॑।
मुश्किल नहीं है कुछ भी अगर ठान लें ये जन।
डोर से संकल्प की बांध दें ये मन ॑
कुछ इस तरह की भावाव्यक्ति हिंदी लेखिका संघ की सदस्याओं ने ऑनलाइन पटल पर दी। साहित्य संगम संस्थान द्वारा नशा मुक्ति जागरूकता अभियान राष्ट्रीय स्तर पर किया जा रहा है। अनेक साहित्यिक संस्थाएं इससे जुड़कर कलम के माध्यम से समाज में जागरूकता पैदा कर रही हैं। गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में भी कलमकारों द्वारा किए ये प्रयास दर्ज किए जाएंगे। हिंदी लेखिका संघ जबलपुर की रचनाकारों ने भी कविताओं के माध्यम से इस अभियान में अपना योगदान दिया। संघ अध्यक्ष अर्चना मलैया ने आयोजन के उद्देश्य और सार्थकता पर प्रकाश डाला। छाया सक्सेना के संयोजन एवं कामना श्रीवास्तव तिवारी के कुशल संचालन में अनिता श्रीवास्तव, डॉ राजलक्ष्मी शिवहरे, अलका मधुसूदन पटेल, चंद्र प्रकाश वैश्य, डॉ भावना शुक्ला,उमा पिल्लै, प्रभा श्रीवास्तव, डॉ मुकुल तिवारी, प्रार्थना अर्गल, प्रियंका श्रीवास्तव, विनीता पैगवार, सिद्धेश्वरी सराफ, अनुराधा सिंह, उमा प्रीति मिश्रा,रत्ना ओझा, डॉ आशा श्रीवास्तव, राजकुमारी रैकवार ने अपनी कविताओं से नशे के दुष्परिणामों के बारे में बताया और व्यसन मुक्त समाज के प्रति आग्रह किया। आभार प्रदर्शन छाया सक्सेना ने किया।



