संयम एवं जागरूकता द्वारा एड्स से बचाव संभव – सरोज मिश्रा

जबलपुर दर्पण डिण्डौरी। जन शिक्षण संस्थान डिण्डौरी के सभागार एवं विभिन्न प्रशिक्षण केन्द्रों पर कोविड 19 प्रोटोकाल का पालन करते हुए एड्स संक्रमण से बचाव विषय पर संगोष्ठी का आयोजन किया गया। प्रशिक्षण केन्द्रों के लाभार्थियों को जानकारी देते हुए संस्थान की लेखाकार रीता मिश्रा ने कहा कि यह एक लाइलाज जानलेवा संक्रमण है जो संक्रमित व्यक्ति के शरीर की प्रतिरोधक प्रणाली को निष्प्रभावी कर देता है। जिससे व्यक्ति अनेक तरह के जानलेवा संक्रमणों का शिकार हो जाता है। कार्यक्रम में मुख्यअतिथि सरोज मिश्रा ने कहा कि इस भयंकर बीमारी का संयम एवं जागरूकता द्वारा ही बचाव संभव है। परिचर्चा के दौरान संस्थान के निदेशक दिवाकर द्विवेदी ने कहा कि भारत एचआईवी एवं एड्स उन्मूलन की दिशा में लगातार कठिन प्रयास कर रहा है। एड्स नामक भयानक कठिन बीमारी ने देश की एक बडी अाबदी को अपने प्रभाव में जकड रखा है। एचआईवी से संबंधित मामलों को पूर्ण रूप से खत्म किये जाने के दिशा में सतत प्रयास किये जा रहे है। इस प्रयास में हमने सफलता भी पाई इसी क्रम में कार्यक्रम अधिकारी अभिषेक अग्रवाल ने अपने वक्तव्य में कहा कि भारत को पूर्णतः एड्स मुक्त होने में अभी समय लगेगा क्योकि अभी भी देश में 15 से 48 वर्ष की उम्र के बीच लगभग 25 लाख लोग इस संक्रमण से प्रभावित है यह आकड़ा विश्व में एड्स प्रभावित लोगो की सूची में तीसरे स्थान पर आता है। संस्थान के सहायक कार्यक्रम अधिकारी सुनील कुमार झारिया ने अपने संबोधन में लाभार्थियों को जागरूक करते हुए बताया कि एडस उन्मूलन के लिये। 1 दिसम्बर को विश्व एड्स दिवस के रूप में मनाया जाता है। यह कोई बीमारी नही बल्कि एक संक्रमण है जो बहुत सूक्ष्म उपायों को अपनाकार इसके संक्रमण से बचा जा सकता है। कार्यक्रम में संस्थान के प्रशिक्षक रामकृष्ण गर्ग, आरती नामदेव, अंजली यादव के साथ संस्थान के समस्त अधिकारी तथा लक्ष्मीनारायण वर्मन ने सक्रिय रूप से सहभागिता कर आयोजन को सफल बनाया। कार्यक्रम आयोजन के दौरान कोविड-19 प्रोटोकाल का पालन किया गया तथा लोगो को तीसरी लहर के प्रति जागरूक रहने के लिये प्रेरित करते हुए कोविड प्रोटोकाल का अनिवार्य रूप से पालन करने के लिये सभी से अपील की गई।



