दासबोध जयंती पर दत्त मंदिर में व्याखान माला का आयोजन

जबलपुर दर्पण। भारतीय संस्कृति को जानने के लिए अगर केवल दासबोध का ही अध्ययन कर लिया जाए, तो पूरी भारतीय संस्कृति को जाना जा सकता है। दासबोध ग्रंथ भारतीय संस्कृति की पूंजी है। इसका अध्ययन हम सभी को करना चाहिए।
समर्थ रामदास ने आत्मा राम, विभिन्न समासो पर सहित्य मे वर्णित किया है। भारतीय संस्कृति मे ग्रंथ भी जीवंत विन्यास है। उक्त उदगार विजय लाड नादेंड महाराष्ट्र, दिलीप महाजन पुणे, सौ रंजना पाटील मुंबई, वरिष्ठ विचारक समर्थ चितंक सुरेश तोफखानेवाले ने कहे, अध्यक्षता सदानंद गोडबोले ने की।
श्री सत्संग सभा यादव कालोनी, आषाढी कार्तिकी वारी महामंडल संस्कृती मंडल, भगिनी मंडल के संयोजन मे दास नवमी के अवसर पर दास लीला, श्रीमद्भागवत पुष्प माला के विमोचन अवसर पर दत्त मंदिर मे आयोजित व्याख्यान माला मे कहे।
इस अवसर पर विजय भावे, राजेश तोपखानेवाले, विश्वास पाटंणकर, विजय दहीबडे, सुरेश पागे, शरद आठले, हेमंत पोहरकर, डा सुनील देशपांडे, भास्कर वर्तक, श्रीकांत बापट, विध्येश भापकर, राजू कोतवाल आदि उपस्थित रहे।



