पत्रकार की परिभाषा तय किया जाना चाहिएः शारदा

भोपाल/मण्ड़ला। आपदा में डुबते को तिनके का सहारा अब प्रश्न यह उठता है कि पत्रकार कौन ? केन्द्र एवं राज्य सरकार को अधिमान्यता प्राप्त पत्रकारों को छोड़कर यह तय करना होगा कि फिर पत्रकार कौन ? केन्द्र एवं राज्य सरकार के अधिकारियों को भली भांति ज्ञात है कि मजीठिया वेज बोर्ड लागू होने से मिडिया संस्थानों ने काम करने वाले पत्रकार एवं अन्य कर्मचारियों को कोई नियुक्ति पत्र नहीं दिया, मेरी जानकारी के अनुसार पत्रकारों से कांटेक्ट, कमीशन एवं टारगेट पर काम करा रहे हैं मैं यहां इस बात को स्वीकार करता हूं कि पत्रकार उपरोक्त शर्तों पर इस लिए काम कर रहे हैं कि अब उनकी मजबूरी हो गई अथवा पत्रकार की चकाचौंध से बाहर नहीं निकलना चाहते । अब अन्य कई प्लेटफार्म आ गये है जिन पर कई मित्र अपने अपने जिले तक सीमित होकर अच्छे से जीवन यापन करते हैं और फिर ?
मैं पुनः बधाई के साथ दोनों सरकारों से निवेदन करता हूं कि सबसे पहले पत्रकार की परिभाषा तय किया जाना चाहिए। वर्तमान में मिडिया संस्थानों ने पत्रकारों एवं गैर पत्रकारों का कोरोना काल में वेतन में कटौती की गई । इस मार को झेलते हुए मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की घोषणा से राहत मिली ।
प्रश्न चिन्ह लग रहा है कि प्रदेश में कांग्रेस सरकार ने आने के बाद छोटे छोटे समाचार पत्रों के विज्ञापन एवं भुगतान पर रोक लगा दी थी ।
बहीं पुनः शिवराज सिंह चौहान के नेतृत्व में भाजपा सरकार बनी तो उसने विज्ञापन एवं भुगतान करने का काम किया ।
शिवराज सिंह चौहान से निवेदन है कि छोटे समाचार पत्रों को आपके पिछले कार्यकाल की तरह पुनः विज्ञापन जारी करने के आदेश करने का निवेदन है ।
एम पी वर्किंग जर्नलिस्ट यूनियन पिछले चार वर्षो से इस प्रयास में थी कि ग्रामीण अंचल , डेस्क पर काम करने वाले पत्रकार एवं अन्य गैर अधिमान्यता प्राप्त पत्रकारों को आर्थिक सहायता मिलें । केन्द्रीय सरकार ने गैर अधिमान्यता प्राप्त पत्रकारों को लाभ पहुंचाने वाली योजना शुरू कर दी है ।
एम पी वर्किंग जर्नलिस्ट यूनियन फोटो ग्राफर, हाकर को भी इस योजना में जोड़ने के लिए पत्र व्यवहार कर रही है प्रयास करने से सफलता प्राप्त होती है ।
इसी कड़ी में एम पी वर्किंग जर्नलिस्ट यूनियन ने केन्द्र सरकार को पत्र में लिखा है कि छोटे समाचार पत्रों, पत्रिका को प्रति माह कम से कम 15000 रुपए के विज्ञापन दें क्योंकि सरकार और जनता के बीच का सेतु है । इसी तरह की मांग राज्य सरकार से भी की गई है ।
हम आभारी हैं मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के जिन्होंने यूनियन की मांग पर अधिमान्यता प्राप्त पत्रकारों को कोरोना वारियर्स माना है हम सभी सरकार के मुखिया शिवराज सिंह चौहान से मांग की थी कि जो पत्रकार किसी भी संस्थान में काम करते उन्हें भी कोरोना वारियर्स माना जाय और मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने एम पी वर्किंग जर्नलिस्ट यूनियन की इस मांग को स्वीकार कर लिया है । आभारी हैं।
केन्द्र सरकार के भी आभारी हैं ।
केंद्र सरकार पत्रकारों की मदद के लिए पत्रकार कल्याण योजना संचालित कर रही है।
पत्रकार की मृत्यु होने पर आश्रितों को पांच लाख की आर्थिक सहायता देने का प्राविधान है। स्थाई दिव्यांगता पर पांच लाख गंभीर बीमारी की दशा में तीन लाख रुपये तथा किसी गंभीर दुर्घटना के कारण उपचार के लिए अस्पताल में भर्ती होने पर दो लाख रुपये देने का प्रावधान है।
केंद्र सरकार पत्रकारों की मदद के लिए पत्रकार कल्याण योजना संचालित कर रही है। योजना की पात्रता के लिए भारत सरकार या किसी राज्य व केंद्र शासित प्रदेश की सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त होना चाहिए। यदि मान्यता प्राप्त नहीं है तथा वे प्रिंट, इलेक्ट्रानिक अथवा वेब आधारित सेवाओं से पिछले कम से कम पांच वर्षों से जुड़े हैं तो भी वे इस योजना के दायरे में आएंगे।
अपर मुख्य सचिव सूचना नवनीत सहगल ने बताया कि पत्रकार की मृत्यु होने पर उनके आश्रितों को पांच लाख रुपये की आर्थिक सहायता दिए जाने का प्राविधान है। स्थाई दिव्यांगता के मामले में पत्रकार को पांच लाख रुपये, कैंसर, रीनल फेल्योर, बाई पास, ओपेन हार्ट सर्जरी, एंजियोप्लास्टी, ब्रेन हैमरेज और लकवाग्रस्त होने जैसी गंभीर बीमारी की दशा में तीन लाख रुपये तथा किसी गंभीर दुर्घटना के कारण उपचार के लिए अस्पताल में भर्ती होने पर दो लाख रुपये देने का प्राविधान है।



