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सैकड़ों साल पुराना शिव मंदिर बन गया कचरा घर

जबलपुर दर्पण। पनागर के मौलाना वार्ड में करीब़ 250 से 300 वर्ष पुराना पुरातात्विक शिव मंदिर है, जोकि वर्तमान में कचड़ा घर बन चुका हैं, शासन प्रशासन द्वारा पुरातात्विक महत्व के इतने पुराने मंदिर के जीर्णोद्वार के लिए आज तक कोई भी पहल नहीं की गई, क्षेत्र के बड़े बुजूर्गों के प्राप्त जानकारी के अनुसार यह शिव मंदि प्राचीन समय में साधना का एक दिव्य स्थल हुआ करता था परंतु समय के अभाव व मंदिर के आसपास हिंदु समाज के किसी भी परिवार के न रहने के कारण यह पुरातात्विक मंदिर पिछले कई शदियों से विरान पड़ा हुआ है, मंदिर की नक्काशी की बात करें तो मंदिर में आज भी हिंदुओं की पुरानी स्थापत्य कला के चित्र जैसें हाथी, मौर, घोड़े की प्रतिमाएं हैं, इसी के साथ मंदिर की स्थापत्य कला को देखकर यह पता चलता है कि इस मंदिर में पूर्व में करीब 25 से 30 पुरातात्विक मूर्तियां रहीं होगीं जोकि आज अस्तित्व में नहीं है, इसी के साथ मंदिर प्रांगण में मुख्य गर्भ गृह के साथ एक और मंदिर भी हैं जोकी समय के साथ अब जर्जर हालत में पड़ा हुआ है, मंदिर का शानदार गोल गुम्बद इस मंदिर के इतिहास को पुनर्जीवित करता है। मंदिर के पास ही एक बड़ा तालाब भी हैं और उसके बगल में एक प्राचीन हनुमान मंदिर भी है जहाँ आज भी श्रद्धालुओं का आना जाना लगा रहता है। जबलपुर के एक एन.जी.ओं. जयहिंद फाउंडेशन द्वारा मंदिर के जीर्णोद्वार का कार्य प्रारंभ किया गया परंतु कीन्ही दबावों के कारण मंदिर जीणोद्धार के कार्य को रोक दिया गया है, अब यह एन.जी.ओं. वापस से मंदिर जिर्णोद्वार करने की मांग कर रहा हैं। हिंदुओं के इस तरह के विरान पड़े पुरातात्विक महत्व के मंदिरों को सरकार द्वारा संरक्षण मिलना ही चाहिए।

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