धूमधाम से मनाया गया भगवान महावीर का जन्म कल्याणक महोत्सव


शहर में निकाली गई भव्य शोभायात्रा एवं जुलूस
जबलपुर दर्पण (आशीष जैन)। जैन नवयुवक सभा एवं दिगंबर जैन पंचायत सभा के द्वारा निकाले जाने वाला भगवान श्री महावीर स्वामी के जन्म कल्याणक महोत्सव का जुलूस एवं शोभायात्रा आज संस्कारधानी जबलपुर के सभी नागरिकों के सहयोग से निकाला गया। इस भव्य शोभायात्रा जुलूस में संस्कारधानी जबलपुर के सभी जैन मंदिरों की पालकी, विभिन्न जन जागरूक एवं धार्मिक संदेशों की झांकियों के साथ शामिल हुए। आज प्रातः सभी जैन मंदिरों में भगवान महावीर स्वामी का जन्म अभिषेक महोत्सव मनाया गया। तत्पश्चात सभी मंदिरों की पालकी एवं भव्य झांकियों के साथ सभी नागरिक बंधु सपरिवार सफेद एवं केसरिया वस्त्र पहन कर कमानिया गेट लाडगंज जैन मंदिर में एकत्रित हुए। शोभा यात्रा का शुभारंभ आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज के परम प्रभाव शिश्य निर्यापक मुनि पुंगव सुधा सागर जी महाराज के ससंग प्रारंभ हुआ और नगर भ्रमण कर वापस बड़े फ्व्वारा में समाप्त हुआ। इस भव्य शोभायात्रा जुलूस में उत्तर मध्य विधानसभा के विधायक विनय सक्सेना, पूर्व राज्य मंत्री शरद जैन सहित सैकड़ों की संख्या मैं सभी दल के प्रमुख नेतागण शामिल रहे। शासन प्रशासन का भी विशेष सहयोग प्राप्त हुआ।
भगवान महावीर जैन धर्म के 24 वे तीर्थंकर हैं जिनका जन्म आज से करीब ढाई हजार साल पहले इशापूर्व 599 वर्ष पूर्व वैशाली के गणतंत्र राज्य, छत्रिय राज परिवार कुंडलपुर में मैं हुआ था। 20 वर्ष की आयु में भगवान महावीर ने संसार से विरक्त होकर राज वैभव त्याग कर सन्यास धारण कर आत्म कल्याण के पथ पर निकल गए। 12 वर्षों की कठिन तपस्या के बाद भगवान महावीर को केवल्य ज्ञान की प्राप्ति हुई और 72 वर्ष की आयु के बाद पावापुरी से मोक्ष प्राप्त हुआ। इस दौरान भगवान महावीर ने अपने विभिन्न स्थानों पर उपदेश दिए इसमें प्रमुख उपदेश जियो और जीने दो है। भगवान ने कई अनुयाई बनाए जो तत्कालिक समय के प्रसिद्ध व्यक्ति एवं संस्थाएं थी। भगवान महावीर की जयंती को विश्व के संपूर्ण जैन समाज के लोग बड़ी ही प्रमुखता एवं भव्यता के साथ मनाते हैं। इस दिवस का विशेष महत्व होता है। आज के दिन जैन समाज के लोग बिना मुहूर्त की शादी विवाह जैसे प्रमुख कार्य संपन्न कर सकते हैं। सभी व्यापारिक प्रतिष्ठान बंद रहते हैं। भगवान महावीर के निर्माण दिवस या मोक्ष दिवस को दीपावली पर्व के रूप में मनाया जाता है।
भगवान महावीर के प्रमुख सिद्धांतों को पंचशील सिद्धांत कहा जाता है। यह उत्तम नैतिक गुण एवं संदेश को प्रदर्शित करता है। जैन धर्म मैं इन सिद्धांतों का विशेष महत्व है। इसमें अहिंसा, सत्य, अपरिग्रह, आचौर्य या अस्तेय और ब्रम्हचर्य। भगवान महावीर ने अपने उपदेशों एवं प्रवचनों में दुनिया को सही राह दिखाने एवं मार्गदर्शन किया। मानव को मानव के प्रति प्रेम और मित्रता से रहने का संदेश नहीं अपितु मिट्टी, पानी, अग्नि वायु, वनस्पति से लेकर कीड़े मकोड़े पशु-पक्षी आदि के प्रति भी मित्रता एवं अहिंसात्मक विचार के साथ रहने के प्रमुख उपदेश दिए। सभी को महावीर जयंती की ढेर सारी शुभकामनाएं जय जिनेंद्र।



