“ग्रामीण क्षेत्रों में” झोलाछाप डॉक्टरो की प्रैक्टिस का एकछत्र राज:स्वास्थ्य विभाग मौन

जबलपुर दर्पण नप्र। जबलपुर एव समूचे ग्रामीण क्षेत्रों में नही थम रही झोलाछाप डॉक्टरो की प्रैक्टिस,सालो से सबसे ज्यादा ग्रामीणों क्षेत्रों में इनका एकछत्र राज है। झोलाछाप डॉक्टर के पास हर बीमारी का इलाज है। इनके आगे एमबीबीएस डॉक्टर भी फेल है। आज कल कई फर्जी डिप्लोमा एव एमबीबीएस डॉक्टर की डिग्री की कॉपी अपने क्लीनिक में लगा कर ये झोलाछाप डॉक्टर प्रैक्टिस कर रहे है। और लाखो रुपए वारे न्यारे कर रहे है। ग्रामीण भगवान की तरह इन झोलाछाप डॉक्टरो को पूज रहे है। यदि मरीज की हालत बिड़ने लगती है तो इनके द्वारा जबलपुर शहर के अस्पतालों में मरीजों को रेफर कर दिया जाता है। मरीज के हॉस्पिटल पहुंचने से पहले ही झोलाछाप डॉक्टर का फोन हॉस्पिटल चला जाता है। और
वहां से भी इनको मोटी रकम कमीशन के तौर पर मिलती है। बहुत सारे झोलाछाप डॉक्टरो ने तो ग्रामीण क्षेत्रों में खुद के क्लीनिक खोल के रखे है इनमे 6-7 प्लग लगे होते है बिना रोक टोक के मरीजों का इलाज कर रहे है। और ये सब सम्भव हो रहा है स्वास्थ्य विभाग की उदासीनता के चलते। बिना स्वास्थ्य विभाग की मदद से झोलाछाप डॉक्टरो की दुकाने कैसे चल रही है यह विचारणीय प्रश्न है। इसके पहले भी जबलपुर दर्पण समाचार पत्र में आयुष डॉक्टर की खबर प्रकाशित की गई थी। जिसमे कार्यवाही तो हुई लेकिन अब डॉक्टर साहिबा के द्वारा दो दवा आयुर्वेद की बाकी दवा एलोपैथिक की लिखी जा रही है। इतनी लापरवाही पाए जाने पर भी स्वास्थ्य विभाग ने इनका ट्रांसफर करने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया जबकि डॉक्टर साहब पिछले 6-7 वर्षो से पाटन में ही जमी है। बुजुर्गों की कहावत है पाटन में बहुत पैसा है इसलिए जो भी अधिकारी कर्मचारी डॉक्टर यहा आता है फिर वो कही अन्य जगह जाने का उसका मन नही होता है। दूसरी खबर पाटन के एक बड़े झोलाछाप डॉक्टर की प्रकाशित की गई थी जिसके पास न तो जिला अस्पताल विक्टोरिया का वैध पंजीयन है। इसके बाद भी शहपुरा मेन रोड पर क्लीनिक को अस्पताल जैसा बना कर धड़ल्ले से मरीजों का इलाज कर अनाप शनाप बिल बना कर अनैतिक रूप से पैसा कमा रहे है। स्वास्थ्य विभाग की मेहरबानी के चलते झोलाछाप डॉक्टरो की प्रैक्टिस जोर-शोर से चल रही है। यदि कोई केस बिगड़ने लगता है तो उससे पहले ही इनकी क्लीनिक के कर्मचारी उक्त मरीज की पर्ची सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पाटन से बनवा कर एक बार मरीज को शासकीय हॉस्पिटल में दिखवा देते है। एक बार मरीज का नाम शास.रिकॉर्ड में दर्ज कर झोलाछाप डॉक्टर अपने आपको सुरक्षित कर लेते है। उसके बाद मरीज का इलाज ये झोलाछाप डॉक्टर ही करते है। यदि इलाज के दौरान कुछ अप्रिय घटना घटी तो उसका सारा इल्जाम शासकीय हॉस्पिटल के डॉक्टर पर लगा दिया जाता है और यह आसानी से कानूनी दांव पेंच से बच निकलते है। अब देखना होगा स्वास्थ्य विभाग इन झोलाछाप डॉक्टरो पर कब कठोर कार्यवाही करता है। या हमेशा की भांति मौन रहता है।




