परिवार को जोड़कर रखने मात्र माताऐ सक्षम : स्वामी अशोकानंद

जबलपुर दर्पण। दो परिवारो को जोड़कर रखने का कार्य माताऐ बहने करती है। माताऐ ही घर परिवार के धन धान्य को बढाने वाली लक्ष्मी है तो संकट से उबारने वाली दुर्गा है । परिवारिक सामाजिक जिम्मेदारियो के साथ राष्ट्रीय और सांस्कृतिक विरासत को भी माताऐ सहेज कर आगे बढाने का कार्य करती है। श्रीकृष्ण ने सभी को एकजुट होकर सत्कर्म करने का संदेश दिया है तो रूक्मणी माता ने दीन दरिद्र मे नारायण के दर्शन कर उनकी भी सेवा की है।उक्त भावुकतापूर्ण उदगार नर्मदा तट भक्तिधाम ग्वारीघाट मे श्रीहरि नारायण के अवतारो के परम पुनीत वैशाख मास के अवसर पर प्रख्यात कथावाचक परम पूज्य स्वामी अशोकानंद महाराज ने श्रीमुख से कहे। कथा के षष्ठम दिवस श्रीमद्भागवत महापुराण महोत्सव मे श्रीकृष्ण रूकमणी विवाहोत्सव हुआ।
वैशाख मास शुक्ल पक्ष मे भगवान श्रीहरि नारायण के वांग्मय स्वरूप श्रीमद्भागवत महापुराण , श्रीविष्णु सहस्त्रनाम का पाठ और श्रवण का विशेष पुण्य कारी महत्व है।
इस अवसर पर परम पूज्य स्वामी विश्वक सेनाचार्य महाराज, अनवर हुसैन, विजय पंजवानी, नरेंद्र केशवानी, हीरा शर्मा, उमेश पारवानी, करिश्मा शर्मा, जया लालवानी, दीप्ति केशवानी, काजल, विमला, वीनू ममता, सोनिया वाकुलकर, पं वेदांत शर्मा, पार्थ, मौर्य, जगदीश दीवान, पप्पू लालवानी, प्रिंस, आनंद, सहित भक्तिधाम ग्वारीघाट भक्त मंडल , संस्कारधानी जबलपुर के भाविक श्रृध्दालुओ की बडी संख्या मे उपस्थिति रही।



