कटनी बनेगा खनन और औद्योगिक विकास का हब

ढीमरखेड़ा जलपुर दर्पण । मध्यप्रदेश का कटनी जिला अपनी खनिज संपदा के कारण एक बार फिर सुर्खियों में है। संगमरमर, बॉक्साइट, चूना पत्थर, डोलोमाइट, फायरक्ले और आयरन ओर जैसे बहुमूल्य खनिजों के उत्पादन के लिए प्रसिद्ध कटनी अब औद्योगिक विकास का हॉटस्पॉट बनने की दिशा में तेजी से बढ़ रहा है। इसी क्रम में 23 अगस्त 2025 को कटनी में माइनिंग कॉन्क्लेव आयोजित होने जा रहा है, जिसमें केंद्रीय कोयला एवं खान मंत्री, प्रदेश सरकार के मंत्री और देशभर से आए 2000 से अधिक उद्योगपति हिस्सा लेंगे।
कटनी की खनिज संपदा
कटनी लंबे समय से उच्च गुणवत्ता वाले मार्बल की खदानों के लिए पहचाना जाता है। यहां उत्पादित संगमरमर की मांग देश-विदेश में रहती है, हालांकि रॉयल्टी और उत्पादन लागत बढ़ने से पिछले वर्षों में कई खदानें बंद हो गईं। फिलहाल जिले में लगभग 10 मार्बल खदानें संचालित हैं।
इसके अलावा बॉक्साइट खनन में भी कटनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। कटनी बॉक्साइट प्राइवेट लिमिटेड और म.प्र. स्टेट माइनिंग कॉरपोरेशन संयुक्त रूप से अनूपपुर की चचंदीह खदानों से बॉक्साइट का खनन कर रही हैं। यह खनिज सीमेंट और एल्यूमिना उद्योग के लिए बेहद उपयोगी है।
2023 में कटनी के बरही और इमलिया इलाके में सोने के भंडार की भी खोज हुई, जहां लगभग 5 टन सोना होने का अनुमान है। भारतीय खान ब्यूरो ने इन क्षेत्रों के लिए माइनिंग प्लान तैयार कर लिया है और निकट भविष्य में खनन गतिविधियां शुरू होने की संभावना है।
जिले में डोलोमाइट, लाइमस्टोन, फायरक्ले, रिवर सैंड और आयरन ओर का खनन भी बड़ी मात्रा में होता है। विश्वकर्मा माइनिंग कंपनी और शांति माइनिंग जैसी निजी कंपनियां इन खनिजों के उत्खनन और प्रसंस्करण में सक्रिय हैं।
माइनिंग कॉन्क्लेव 2025 से विकास की नई राह
आगामी कॉन्क्लेव का उद्देश्य कटनी को खनन और औद्योगिक विकास का प्रमुख केंद्र बनाना है। इस आयोजन में निवेश के अवसरों पर चर्चा होगी और खनिज आधारित उद्योगों को जिले में स्थापित करने की संभावनाओं पर विमर्श किया जाएगा।
पर्यावरणीय चुनौतियां भी बड़ी चिंता
खनन ने जहां कटनी को आर्थिक अवसर दिए हैं, वहीं पर्यावरण पर इसके नकारात्मक प्रभाव भी सामने आए हैं। स्लीमनाबाद क्षेत्र में मार्बल खदानों से निकला मलबा तीन नदियों को नष्ट कर चुका है, जिससे ग्रामीण इलाकों में गंभीर जल संकट खड़ा हो गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि सतत खनन और पर्यावरण संरक्षण की नीतियों को साथ लेकर चलना अनिवार्य है।
निष्कर्ष
कटनी आने वाले वर्षों में खनिज और औद्योगिक विकास का हब बन सकता है। यहां की प्राकृतिक संपदा उद्योगों को आकर्षित करती है, लेकिन साथ ही पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखना और स्थानीय जनता के हितों की रक्षा करना भी उतना ही जरूरी होगा।



