सत्संग सुनकर सत्कर्म की मिलती प्रेरणा: घनश्यामाचार्य महाराज

जबलपुर दर्पण। श्रीमद् भागवत महापुराण कथा ज्ञान यज्ञ महोत्सव के षष्टम दिवस व्यासपीठ पर विराजमान मद्जगदगुरु रामानुजाचार्य, स्वामी घनश्यामाचार्य जी महाराज अलोपीबाग प्रयागराज के मुखारबिंद से श्रीमद् भागवत कथा के षष्ठम दिवस पर महाराज ने पुतना उद्धार, कृष्ण रुक्मिणी विवाह एवं श्री कृष्ण की बाल लीलाओं का सुंदर वर्णन भक्तों को श्रवण कराया। कथा के षष्ठम दिवस पर सभी भक्तों ने महाराज के श्रीमुख से कथा का श्रवण किया। विशिष्ट अतिथि के रुप में गीताधाम जबलपुर से परम पूज्य पीठाधीश्वर नृसिंह दास महाराज का शुभागमन हुआ।
स्वामी महाराज ने कथा मे कहा कि जिनको वेद पुराण वर्जित करते है उन कार्यो को हम लोग उम्र भी नहीं होती उससे पहले शुरू हो जाते है चाहें वो नशा करना हो चाहे झूठ बोलना हो कोई नही सिखाता, सत्संग सुनकर सत्कर्म की प्रेरणा मिलती है, इसलिए सत्संग में जाना चाहिए सत्संग सोये हुए आदमी को जगा देता है। कथा मे कामता पाण्डेय, दिलीप पांडेय सहित श्रृध्दालुओ की उपस्थिति रही।



