शिक्षा में संस्कार का समन्वय ही स्वर्णिम भारत का आधार

जबलपुर दर्पण। प्रजापिता ब्रह्मा कुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय शिव स्मृति भवन नेपियर टाउन जबलपुर का सभागार आज स्वर्णिम भारत के सपनों को साकार करने वाले शिक्षकों से सुशोभित रहा| शिक्षक दिवस के एक दिन पूर्व आयोजित कार्यक्रम में अतिथि के रूप में उपस्थित भ्राता डॉ पुष्पराज बघेल (असिस्टेन्ट रजिस्ट्रार, मेडिकल यूनिवर्सिटी जबलपुर) ने उक्त अवसर पर कहा कि आज शिक्षा का प्रचार प्रसार चारों ओर है लेकिन शिक्षा का व्यावहारिक जीवन में प्रयोग बहुत कम दिखाई दे रहा है, आवश्यकता है उस शिक्षा को अपने जीवन में चरित्र के रूप में धारण करने की। कार्यक्रम में उपस्थित भ्राता सुधीर उपाध्याय (डी ओ जबलपुर) ने कहा कि हमारी पारंपरिक शिक्षा ही आत्मा को परमात्मा से जोड़कर उनमे संस्कारों के बीजारोपण का आधार है.
अतिथि के रूप में उपस्थित प्रो. बलिराम अहिरवार ने कहा कि शिक्षा ही वो शेरनी का दूध है जिसका पान करके अपने कार्य क्षेत्र में सिंह के सामान दहाड़ा जा सकता है.
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रही प्रजापिता ब्रह्मा कुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय शिव स्मृति भवन नेपियर टाउन सेवाकेंद्र प्रभारी राजयोगिनी ब्रह्मा कुमारी भावना बहिन ने कहा कि आज के वर्तमान समय में शिक्षा के साथ साथ श्रेष्ठ संस्कारों की भी अत्यंत आवश्यकता है, श्रेष्ठ संस्कार के आधार पर ही श्रेष्ठ संसार की कल्पना साकार की जा सकती है| आज शिक्षा जगत में अत्यधिक उन्नति के साथ साइंस के साधन एवं तकनिकी शिक्षा का अत्यंत विकास होने के बाद भी उसका पूर्ण लाभ हमें प्राप्त नहीं हो पा रहा है जिसका मूल कारण कहीं न कहीं हमारे मूल्यहीन संस्कार है| अत: आवश्यकता है स्वयं को यथार्थ रूप से पहचान, अपनी आध्यात्मिक शक्ति को जागृत कर शिक्षा का श्रेष्ठ संस्कारो के साथ समन्वय स्थापित करते हुए उसे अपने कार्य व्यवहार में लाना|
कार्यक्रम में ब्रह्मा कुमारी वर्षा बहिन ने राजयोग की व्यावहारिक जीवन में उपयोगिता एवं उसके सकारात्मक प्रभाव के विषय में प्रकाश डालते हुए उसको अपने जीवन में नियमित रूप से धारण करने के लिए सेवाकेंद्र में आमंत्रण दिया एवं उसकी सुखद अनुभूति भी कराई| डॉ श्यामजी रावत कैंसर विशेषज्ञ ने संस्था का परिचय दिया।

