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चीता-बिल्ली, एक समान

✍🏻 आशीष जैन (उप-संपादक) जबलपुर दर्पण।

चीता आये देश में, हो गये सब बलवान।
औरन को सब भूल गये, ये सब बडे नादान।।
एक दिन का राजा बन, चीता तो हो गये भगवान।
सभी ऐसे देख रहे, जैसे हो बलवान।
बड़ी बिल्ली सा लगता, सिंह से क्या समान।
तेंदुए से डरता यह, कैसा यह बलवान।।
उडनखटोले से आया यह, समझे आपनी शान।
समय बताऐगा सभी को, चीता बिल्ली एक समान।।
अपनों की परवाह न करके, मर रहीं लाख़ों जान।
अपना कैसे माने इनको, यह विदेशी मेहमान।।
मध्यप्रदेश है बीच में, रखता अपनी शान।
चीते को रख लिया, बनाकर नया मेहमान।।
चीता बिल्ली एक समान।
चीता बिल्ली एक समान।।



