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पाटन जनपद पंचायत का लेखपाल कैसे बना करोड़ों की संपत्ति का मालिक

लेखपाल वर्षी से अपने गृह नगर में जमे:बरगद के पेड़ की तरह जमाई रिश्वतखोरी की जड़े

जबलपुर दर्पण पाटन ब्यूरो/राजेंद्र सिंह की रिपोर्ट। पाटन के शासकीय कार्यालय में अंगद के पैर की तरह जमे अधिकारीयों-कर्मचारियों का ट्रांसफर नहीं होने की वजह से पाटन क्षेत्र की जनता इन दिनों भ्रष्टाचारियों से बेहद परेशान है। बिना रिश्वत दिए कोई काम नही हो रहे है। आज हम आपको जिले की जनपद पंचायत पाटन में लगभग सन 1980-82 में दैनिक वेतन भोगी कर्मचारी के रूप में काम करने वाले मामूली से कर्मचारी ने जनपद पंचायत में अपनी सेवा देना शुरू करके फिर दुबारा कभी पलट कर पीछे नही देखा हालाकि जनपद कार्यालय से उक्त कर्मचारी की सेवा पुस्तिका से जानकारी मांगी गई लेकिन अधिकारियों द्वारा जानकारी देने से इंकार कर दिया गया और योगिता न होते हुए भी आज उस कर्मचारी की धमक के आगे जनपद सीईओ भी पानी भरते नजर आते है। हम बात कर रहे है पाटन जनपद में अपनी सेवा शुरू करने वाले दैनिक वेतन भोगी कर्मचारी बीपी सोनी की जो मूलतःपाटन के निवासी है और 1980-82 के दशक में पाटन जनपद में दैनिक वेतन भोगी कर्मचारी के रूप में भर्ती होकर चंद वर्षी में स्थाई कर्मचारी बन कर आज पाटन जनपद में लेखापाल के पद पर आसीन होकर अपनी सेवा दे रहे है। इनका जुगाड़ मेंट इतना तगड़ा था कि चंद वर्षी में ही स्थाई कर्मचारी बन गए। लेखपाल की सेटिंग का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है। कि सर्विस जॉइनिंग दिनांक से आज तक सिर्फ दो माह के लिए मझौली जनपद पंचायत में इनका ट्रांसफर हुआ था उसके बाद तगड़ी सैटिंग की दम पर दो माह बाद पुनःजनपद पंचायत पाटन में अपनी पदस्थापना कराकर शान के साथ अंगद के पैर की तरह जमे है।

रिश्वतखोरी का बेताज बादशाह लेखपाल:- चुकी मूलतः पाटन का निवासी होने के कारण पाटन की तासीर से भली भांति परिचित है लेखपाल वीपी सोनी, वे यह बात अच्छे से जानते है कि किससे कैसे सम्बन्ध बना कर रखना है। और किसको अपनी उंगलियों पर नाचना है। लेखपाल की कार्य गुजारियो की फेरलिस्ट बहुत लंबी है। इनके द्वारा सरपंच सचिव से कार्य योजना की लागत की रकम पर 5-6% कमीशन का पैसा लिए बिना इनकी टेबिल से फाइल आगे ही नहीं बढ़ती इनके द्वारा जनपद पंचायत की मुख्य मार्ग पर भूमि एवं भवन जिनका बाजार मूल्य करोड़ो रूपए में है। मामूली से किराए पर जनपद की प्रापर्टी अपने चहेतों में बदर बाट कर लाखों रूपये की रिश्वत लेकर भ्रष्टाचार किया गया है। साथ ही जनपद में भी फर्जी बिलो के माध्यम से लाखों रू का भुगतान किया गया है। पाटन की पंचायत में होने वाले भ्रष्टाचार की मुख्य वजह वीपी सोनी लेखपाल है। यदि लेखपाल पर पूरी ईमानदारी से जांच शुरू की जाय तो और भी तथ्य चौकाने वाले सामने आ सकते है।

ज्ञान विजय ग्रुप के बिल्डर पाण्डे बंधुओ से लेखपाल की मित्रता:- पाण्डे बंधु जिनकी साईट कटंगी रोड पर ज्ञान विजय परिसर के नाम से चल रही है और सभी विभागों से एनओसी प्राप्त कर प्लाटिंग की गई है। लेखापाल की मेहरबानी के कारण जनपद पंचायत की जमीन पर बिल्डर से मोटी रकम लेकर शासकीय जनपद पंचायत की जमीन पर रोड बनाने की अनुमति दे दी गई। रोड़ भी तत्काल बनकर तैयार हो गई और पाटन एवं आस पास के रिटायर कर्मचारी, किसान, आमजनों ने प्लाट खरीद लिए। इसी मामले में पाटन एसडीएम से शिकायत भी की गई है और मामला एसडीएम न्यायलय में विचाराधीन हैं। बिल्डर को प्लाट बेचने की अनुमति देने में शासन के प्रायः सभी विभाग दोषी है। क्योंकि इनके द्वारा सही तथ्य को दरकिनार कर बिल्डर को अनुमति दे दी गई। अब जिन लोगों ने अपनी जमा पूजी से प्लाट खरीदे है। उनका क्या होगा यदि शासन का फैसला बिल्डर के पक्ष में नहीं आता है तो यह प्लाट मालिक किस रोड़ के सहारे अपने प्लाट तक पहुंच पाएंगे।,क्या बिल्डर के इस फर्जीवाड़े पर 420 का प्रकरण दर्ज होगा। क्या जिन लोगों ने प्लाट खरीदे है उनको न्याय मिलेगा। सूत्र से मिली जानकारी अनुसार कुछ प्लाटो को लेखपाल और अन्य लोगों को उपहार स्वरूप देने की जानकारी है। दबी जुबान में कुछ लोग कहते है इस पूरी हेराफेरी के मास्टर माइंड वीपी सोनी लेखपाल है। जनपद की जमीन पर रोड़ की अनुमति देने पर इस प्रोजेक्ट में कुछ परसेंट की पार्टनरशिप बिल्डर के द्वारा लेखपाल को दी गई है। उक्त जमीन घोटाले का फैसला आने के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो पाएगी।

करोड़ो की संपत्ति का मालिक कैसे बना लेखपाल:- वीपी सोनी आखिर मामूली सी सैलरी में भर्ती होकर आज लगभग 60 से 65 हजार की रुपए की सैलरी पाने वाला कैसे करोड़ो रुपए की प्रापर्टी का मालिक बन गया। लेखपाल के ठाटबाट तो निराले है। कार,विजय नगर जबलपुर में करोड़ो रूपये की लागत से बना आलीशान बंगला साथ ही लग्जरी फर्नीचर,भोग विलास के सभी साधन बंगले में उपलब्ध इसके अलावा एक और मकान विजय नगर में साथ ही कई प्लाट,एवं दुकानों का मालिक कैसे बना लेखपाल, साथ ही पाटन के बनवार में 10-12 एकड़ का कृषि फार्म हाउस जिसका बाजार मूल्य ही करोड़ रुपए के आसपास है।,पाटन में प्लाट एवं कई मकान है। सूत्र से मिली जानकारी अनुसार कोटा एवं भोपाल में भी फ्लैट का मालिक है जहां इसकी बेटियां डॉक्टरी की पढ़ाई कर रही है। जिसका महीने का खर्च ही लाखों रूपये में होता है। साथ की करोड़ो रुपए की लागत से उड़ना में निर्माणाधीन हॉस्पिटल जो अपनी बेटी के लिए बनवाई जा रही है। आखिर इतनी सैलरी में आज के इस कठिन समय में कैसे संभव है। यह जांच का विषय है। आखिर करोड़ों रुपए की प्रॉपर्टी का मालिक कैसे बने लेखपाल,और भी कई बेनामी संपत्ति के मालिक है वीपी सोनी। यदि शासन के द्वारा लेखपाल की संपति की जांच होती है तो और भी तथ्य चौकाने वाले सामने आने की उम्मीद हम कर सकते है।

जनपद पंचायत पाटन में 42 वर्ष से जमे अंगद की तरह लेखपाल श्री सोनी :- लेखपाल वीपी सोनी आखिर लगभग 42 वर्षी से पाटन जनपद में अपनी सेवा दे रहे है। इतने वर्षी के सेवाकाल में इनका ट्रांसफर न होने की क्या वजह है। शायद 1995 में एक बार इनकी सैटिंग फैल होने की वजह से इनको मात्र 2 महीने के लिए मझौली में सेवा देने जाना पड़ा था। लेकिन तगडे जुगाड़मेन्ट के चलते पुनः 2 माह में ही पाटन वापिस आकर जम गए। आखिर नौकरी तो कही भी की जा सकती है। फिर पाटन जनपद ही क्यों..? इसकी प्रमुख वजह यह है कि लेखपाल ने रिश्वतखोरी करके अपनी गहरी जड़े पाटन जनपद पंचायत में जमा ली है। और रिश्वतखोरी का धंधा पाटन में इनके कारण ही भली भांति फल फूल रहा है। अब देखना होगा वरिष्ठ अधिकारी कब तक इस सेटिंगबाज लेखपाल पर सक्त कार्यवाही करते है। और इनके विरुद्ध विभागीय जांच शुरू करते है। जिससे पाटन जनपद पंचायत में आने वाली सभी ग्राम पंचायत के सरपंच सचिव को राहत मिल सके।

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