बैंकों के घटते ब्याज दर से देश के वरिष्ठ और ब्याज पर आश्रित नागरिक हो रहे दुर्दशा के शिकार : तरुण भनोत

पूर्व वित्त मंत्री ने केन्द्रीय वित्त मंत्री को लिखा पत्र
जबलपुर दर्पण। पूर्ववर्ती सरकारों द्वारा वरिष्ठ नागरिकों खासकर ऐसे नागरिक जो भारत सरकार या राज्य सरकारों के उपक्रमों में कार्यरत थे, किन्तु उनको पेंशन आदि बुनियादी अधिकारों से वंचित रखे जाने के कारण सेवानिवृत्ति के समय उन्हे मिलने वाली एकमुश्त राशि को राष्ट्रीयकृत बैंकों में जमा राशि पर उन्हे सालाना 9.20% से अधिक की दर से ब्याज का भुगतान किया जाता था, ताकि वे उस ब्याज के रकम से अपने जीवन के शेष क्षणों में किसी पर निर्भर होने के बजाये, वे आत्मसम्मान के साथ अपना जीवन यापन कर सकते थे | किन्तु, यह दुखद हैं कि पिछले 8 वर्षों के भाजपा और मोदी शासनकाल के दौरान वरिष्ठ नागरिकों को जमा राशि पर राष्ट्रीयकृत बैंकों द्वारा मिलने वाले ब्याज की रकम में अप्रत्याशित रूप से 40% से अधिक की कमी दर्ज की गई हैं, जिससे इस भीषण महंगाई के दौर में वरिष्ठ नागरिक जो बैंकों में जमा बचत पर मिलने वाले ब्याज से अपना भरण-पोषण कर रहे थे, वर्तमान में उनके सामने गंभीर आर्थिक संकट खड़ा हो चुका हैं | उक्त आरोप प्रदेश सरकार में पूर्व वित्त मंत्री एवं जबलपुर पश्चिम से विधायक तरुण भनोत ने लगातार बैंकों के ब्याज दर में कटौती करने से वरिष्ठ नागरिकों की दुर्दशा को लेकर केंद्र की मोदी सरकार पर लगाये हैं |
विधायक भनोत ने केन्द्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण को प्रेषित पत्र मे बताया कि मोदी सरकार के कार्यकाल के दौरान महज 8 वर्षों में देश के नामी-गिरामी उद्धोगपति घरानों को लाखों-करोड़ों रुपये के कर्ज दिए गए बल्कि 10 लाख करोड़ रुपये से अधिक का कर्ज माफ किया जा चुका हैं | एक तरफ जहां राष्ट्रीयकृत बैंकों द्वारा उधोगपतियों के लाखों करोड़ रुपये सरकार की मंजूरी से माफ किए जा रहे हैं तो दूसरी तरफ इस देश के करोड़ों जनसामान्य का बैंकों में जमा राशि पर लगातार ब्याज दरों को कम किया जा रहा हैं, जिससे जमा पैसों पर मिलने वाले ब्याज के पैसों पर जीवन-यापन करने वाले लोगों के सामने गंभीर संकट खड़ा होता जा रहा हैं |
गौरतलब हैं कि सरकार की गलत आर्थिक नीतियों के कारण इस देश का असंगठित क्षेत्र पूरी तरीके से बर्बाद होने के कगार पर हैं | देश में भीषण महंगाई पिछले तीन दशक के सभी रिकार्ड तोड़ चुके हैं और ऐसे समय अपनी जमा-पूंजी के सहारे जीवन यापन कर रहे देश के लाखों वरिष्ठ नागरिकों के सामने अपनी बुनियादी जरूरतों को पूरा करने की गंभीर चुनौती हैं | सरकार ने पहले वरिष्ठ नागरिकों की जमा राशि के लिए एक योजना 9.20% की शुरू की थी लेकिन जुलाई 2019 में इसे घटाकर 8.3% कर दिया गया, और फिर मई 2020 में घटाकर 7.4% कर दिया | इसके अलावा जमा की अधिकतम सीमा केवल 15 लाख रुपये तक कर दी गई हैं, जो निश्चित रूप से सरकार और रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया का अनुचित निर्णय हैं |
श्री भनोत ने वित्त मंत्री को प्रेषित पत्र के माध्यम से आग्रह किया हैं कि इस भीषण महंगाई के दौर में जबकि आवश्यक खाध-पदार्थों की कीमत में अप्रत्याशित रूप से इजाफा हो चुका हैं और देश का जनसामान्य दुर्दशा का शिकार हैं, ऐसे समय में आवश्यक हैं कि वरिष्ठ नागरिकों के बैंकों में जमा राशि पर ब्याज के रूप में हो रहे नुकसान से सरकार उन्हे उबारने का प्रयास करें, अन्यथा निकट भविष्य में बैंकों पर लगातार बढ़ते कर्ज और एनपीए का खामियाजा न केवल इस देश के वरिष्ठ नागरिकों बल्कि जनसामान्य को भी भुगतान पड़ेगा।


