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500 करोड़ की कॉलोनी को लाभ पहुंचाने बनी जनभागीदारी की सड़क ,अब ईओडब्ल्यू में हुई शिकायत

जबलपुर। जबलपुर के लक्ष्मीपुर में जनभागीदारी से बनी डेढ़ किलोमीटर की सड़क का मामला एक बार फिर गरमा गया है ,जनभागीदारी से बनी इस सड़क को लेकर शिकायतकर्ता अमितेंद्र कुमार राय ने डीजीपी ईओडब्ल्यू, एसपी ईओडब्ल्यू,और जबलपुर संभागीय आयुक्त को एक बार फिर शिकायत की है इस शिकायत में उन्होंने अधारताल के तत्कालीन तहसीलदार मुनव्वर खान के खिलाफ शिकायत की है तो शताब्दीपुरम में बनाई जा रही एमएच रेसीडेंसी का भी मामला उठाया है, दी गई शिकायत में आरोप लगाया गया है कि एमएच रेसीडेंसी में जाने के लिए कोई सड़क नहीं थी, सड़क के लिए उन्होंने 2016 में तत्कालीन तहसीलदार मुनव्वर खान की मदद से पूरा नक्शा ही बदल दिया 2012 में स्वीकृत नक्शे में फेरबदल कर खसरा नंबर 2012 में जो टुकड़े दर्शाए गए थे उन्हें मिटा दिया गया अभी तक शैलेश जॉर्ज की भूमि खसरा नंबर 56 /6 एक कोने से बदलकर दूसरे कोने में दर्शा दी गई और शैलेश जार्ज की जमीन पर भी रोड निकाल दी गई जबकि इस दौरान उपरोक्त भूमि पर विभागीय अधिकारी के यहां से स्थगन आदेश था लेकिन इस आदेश को भी दरकिनार कर दिया गया।
मुनव्वर खान ने उपरोक्त भूमि पर आनन फानन सड़क का आदेश जारी कर दिया-शिकायत में बताया गया है कि इस पूरे मामले की जब आर्थिक अन्वेषण ब्यूरो में शैलेश जॉर्ज के द्वारा शिकायत की गई तो आर्थिक अन्वेषण ब्यूरो के एसपी द्वारा जांच करने के उपरांत अनियमितता पाई गई एवं मुनव्वर खान की एफ आई आर दर्ज कराने हेतु मध्यप्रदेश शासन को आर्थिक अन्वेषण ब्यूरो द्वारा पत्र लिखा गया लेकिन उसमें अनुमति नहीं दी गई फिलहाल यह मामला दबा दिया गया है जिस पर पुनः कार्यवाही की मांग की है।

नियम विरुद्ध रूप से बना ब्रिज-जो सड़क बनाई गई है उसका आदेश 18 अगस्त 2016 को हुआ जिसका क्रमांक 32 है उसमें आवेदक शैलेश जॉर्ज की भूमि पर सड़क बनाने की अनुमति नहीं ली गई फर्जी दस्तावेज बनाकर एवं नक्शे में फेरबदल करके शैलेश जॉर्ज की भूमि को सड़क से हटाकर कहीं और दिखा दिया गया जबकि रजिस्ट्री में सड़क पर वह भूमि स्थित है सड़क के लिए इस भूमि को दान में लिया गया है 18 लोगों की जमीन के मूल रकवा से सड़क में दिया गया दान का रकवा नहीं घटाया गया यानी सड़क डाल दी गई और मूल रकवा से किसी की जमीन घटी ही नहीं यह एक बड़ा फर्जीवाड़ा है इस जमीन को मध्यप्रदेश शासन की खाली पड़ी सीलिंग की जमीन से दर्शा दिया यानी जमीन मालिकों से ली लेकिन उसका रकबा नहीं घटा केवल कागजों में उनका दान लिया गया और सड़क मध्यप्रदेश शासन भूमि पर डाल दी गई खसरा नंबर 68 /4 में यह एमएच रेसीडेंसी को उपकृत करने के लिए किया गया।

बाहुबली विधायक का भी हाथ–शिकायत में लिखा गया है कि एमएच रेजीडेंसी की विकास अनुमति को विभागीय अधिकारी अधारताल के स्थगन आदेश के चलते विकास अनुमति जारी की गई और यह दर्शा दिया गया कि इसके आदेश की कॉपी हमारे पास तक नहीं पहुंची उपरोक्त घटना में नगर निगम के कुछ अधिकारियों को घर पर बुलाकर पुरानी तिथि पर एक बाहुबली विधायक ने अपने घर पर उपरोक्त विकास अनुमति जारी करा दी थी जिसकी जानकारी नगरपालिका के छोटे कर्मचारियों को भी नहीं लगी उपरोक्त शिकायत की जांच हेतु संभागीय कमिश्नर ने आदेश जारी कर दिए है साथ ही नगर एवं ग्राम निवेश कार्यालय द्वारा भी इस प्रकरण की जांच की जा रही है । एमएच रेसीडेंसी बिल्डर हर्ष पटेल मंगल पटेल द्वारा बनाई जा रही है।

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