श्री कृष्ण की समृद्धि हेतु सुदामा ने स्वीकारी दरिद्रता

भगवान श्री कृष्ण के मित्र सुदामा के बारे में यह कथानक सर्वथा अनुचित है की गुरुमाता द्वारा दिए गए कृष्ण के हिस्से के चावल चुराकर खाने से सुदामा दरिद्र हुए।वास्तव में वे चावल अभिषापित थे।ब्रह्मज्ञानी सुदामा को मालुम था की जो व्यक्ति इन चावलों को खाएगा वह जीवन भर के लिए दरिद्र हो जाएगा। इसीलिए श्रीकृष्ण को दरिद्रता से बचाने हेतु सुदामा ने पूरे चावल स्वयं खा लिए। स्वामी श्रेयांश जी महाराज ने गंगानगर में चल रही श्रीमद्भागवत कथा में सुदामा चरित्र की मीमांशा करते हुए व्यक्त किए। कथा के पूर्व व्यास पीठ का पूजन राज्य शिक्षा सलाहकार डॉ. श्रद्धा तिवारी, डॉ.एच.पी.तिवारी, सुनीता विश्वकर्मा, रत्ना दीक्षित, व जीवेश पांडे ने किया।



