प्रतिकूल को अनूकूल बनाते हैं महादेव- स्वामी नरसिंह दास

जबलपुर दर्पण। समतत्व ही शिव तत्व है,जीवन प्रतिपल एक नईं चुनौती प्रस्तुत करता है लेकिन जो इन सभी प्रतिकूलताओं अथवा अनुकूलताओं को समभाव से स्वीकार कर लेता है,वही जीवन महान भी बन पाता है।भगवान भोलेनाथ के जीवन की यह सीख बड़ी ही अद्भुत है कि कभी दूध मिला तो प्रसन्न हो गये व कभी केवल पानी ही मिला तो भी प्रसन्न हो गये।कभी शहद अर्पित हुआ तो प्रसन्न हो गये और कभी धतूरा ही मिला तो सहर्ष स्वीकार कर लिया।
केवल एक विल्व पत्र पर रीझने वाले भगवान भोले नाथ जीव को यह सीख देना चाहते हैं,कि जरूरी नहीं कि हर बार उतना ही मिलेगा जितनी आपकी अपेक्षा है।कभी-कभी कम मिलने पर भी अथवा जो मिले,जब मिले और जितना मिले उसी में संतुष्ट रहना तो सीखो,तुम आशुतोष बनकर अवश्य पूजे जाओगे।
उक्त उद्गार श्री नर्मदेश्वर महादेव के महा रूद्राभिषेक, षोडशोपचार पूजन में नरसिंह मंदिर शास्त्री ब्रिज में श्री नरसिंहपीठाधीश्वर डॉ. स्वामी नरसिंह दास जी महाराज ने कहे भगवान आदिदेव नर्मेदेश्वर महादेव का आक धतूरा रजनीगंधा गुलाब गेंदा अपराजिता मोगरा चंपा के फूलों, बिल्वपत्रों से श्रृंगार किया
श्रावण मास महोत्सव के अवसर पर आज की अभिषेक मे रामजी पुजारी,लालमणि मिश्रा. प्रवीण चतुर्वेदी. रामफल शास्त्री. संदीप मिश्रा. हरीओम. संदीप, अमित सुनील सहित भक्त जनों की उपस्थिति में पूजन. कामता महाराज , हिमांशु प्रियांशु ने संपन्न कराया ।
श्रावण मास महोत्सव में नरसिंह मंदिर में नर्मेदेश्वर महादेव जी का प्रतिदिन सुबह 9 बजे से रुद्राभिषेक पूजन अर्चन में सभी भक्तों से उपस्थिति का आग्रह हैं ।



