राष्ट्रीय जीएम नीति में किसान की राय शामिल करने की मांग

भारतीय किसान संघ ने सौंपा ज्ञापन
जबलपुर दर्पण। भारतीय किसान संघ ने राष्ट्रीय जीएम (जेनेटिकली मॉडिफाइड) नीति निर्माण में किसानों की राय को प्राथमिकता देने की मांग की है। इसके तहत संघ ने देशव्यापी जनजागरण अभियान के अंतर्गत लोकसभा और राज्यसभा के सदस्यों, लोकसभा अध्यक्ष, और राज्यसभा सभापति को ज्ञापन सौंपने का कार्य शुरू किया है। इसी कड़ी में जबलपुर के सांसद आशीष दुबे को संघ के प्रतिनिधिमंडल ने ज्ञापन सौंपा।
सांसद से चर्चा में उठे मुद्दे
प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व कर रहे किसान संघ के अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख राघवेन्द्र सिंह पटेल ने कहा कि जुलाई 2024 में सर्वोच्च न्यायालय ने केंद्र सरकार को चार महीने में राष्ट्रीय जीएम नीति बनाने का निर्देश दिया था। इस नीति में किसानों, कृषि वैज्ञानिकों, राज्य सरकारों, और उपभोक्ता संगठनों जैसे सभी हितधारकों की राय शामिल करने की आवश्यकता है।
ज्ञापन में आग्रह किया गया कि आगामी शीतकालीन सत्र में इस विषय पर संसद में चर्चा की जाए और किसानों की राय को नीति निर्माण में प्रमुखता दी जाए।
प्रतिनिधिमंडल में शामिल सदस्य:
इस अवसर पर अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख राघवेन्द्र सिंह पटेल, प्रदेश उपाध्यक्ष ओम नारायण पचौरी, प्रांत महामंत्री प्रहलाद सिंह पटेल, प्रांत उपाध्यक्ष मोहन तिवारी, जिला अध्यक्ष रामदास पटेल, प्रचार प्रमुख मनोज मिश्रा, और अन्य किसान संघ के पदाधिकारी मौजूद रहे।
सर्वोच्च न्यायालय का आदेश
23 जुलाई 2024 को सर्वोच्च न्यायालय ने सरकार को निर्देश दिया था कि जीएम फसलों की नीति में पर्यावरण और स्वास्थ्य पर प्रभाव, व्यवसायिक उपयोग के मानक, आयात-निर्यात नियम, और जनता में जागरूकता जैसे मुद्दों पर विचार किया जाए।
जीएम समिति पर सवाल
सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के तीन महीने बाद भी सरकार द्वारा गठित समिति ने किसी हितधारक से परामर्श नहीं किया है। इससे किसानों में आशंका बढ़ गई है कि बिना विचार-विमर्श के जीएम फसलों को अनुमति दी जा सकती है।
किसान संघ का विरोध
किसान संघ ने जीएम फसलों को असुरक्षित बताते हुए कहा कि ये जैव विविधता को नुकसान पहुंचाती हैं और ग्लोबल वार्मिंग को बढ़ाती हैं। बीटी कपास का उदाहरण देते हुए संघ ने बताया कि इसके विफल होने से किसानों को बड़े आर्थिक नुकसान का सामना करना पड़ा था।
संघ की मांगें:
- जीएम फसलों के प्रभाव का विस्तृत अध्ययन।
- किसानों और अन्य हितधारकों की राय शामिल करना।
- पर्यावरण और जैव विविधता की रक्षा।
किसान संघ ने यह स्पष्ट किया कि भारत को ऐसी कृषि नीति चाहिए जो स्थानीय पर्यावरण, रोजगार सृजन, और जैविक खेती को प्रोत्साहित करे। जीएम फसलों की अनुमति से किसान और देश दोनों को नुकसान हो सकता है।



