गोदरेज घरेलू कीटनाशकों के लिए गुड नाइट मिनी और हिट नो गैस स्प्रै किया लॉन्च

जबलपुर दर्पण। मच्छर जनित बीमारियों के खिलाफ वैश्विक लड़ाई में भारत ने एक बड़ी छलांग लगाई है। गोदरेज कंज्यूमर प्रोडक्टस लिमिटेड (जीसीपीएल) द्वारा विकसित दो स्वदेशी नवाचार दुनिया का सबसे कम लागत वाला लिक्विड मॉस्किटो रिपेलेंट डिवाइस और नो गैस इंस्टेंट मॉस्किटो किल स्प्रे को मध्य प्रदेश में लॉन्च किया गया।
ब्रांडेड गुड नाईट मिनी लिक्विड और हिट नो गैस स्प्रे, ये नवाचार कम आय वाले उपभोक्ताओं के लिए मच्छरों से बचाने वाले सुरक्षित और धूम्र रहित समाधानों को सुलभ बनाते हैं। आज निम्न आय वाले अधिकांश लोग अधिक धुआं देने वाले असुरक्षित और अनियंत्रित अगरबत्तियों का उपयोग करते हैं। डॉक्टर मच्छर भगाने के लिए इन नकली अगरबत्तियों का उपयोग न करने की चेतावनी देते हैं क्योंकि इनसे ब्रोंकाइटिस, अस्थमा, रिएक्टिव एयरवे बीमारी और अन्य समस्याएं पैदा हो सकती है, जबकि विनियमित और सुरक्षित धूम्ररहित समाधानों के बारे में व्यापक रूप से लोगों को जानकारी थी, लेकिन अब तक ये ऊँची कीमतों पर ही उपलब्ध थे और इन समाधानों की विशेषताएं इन उपभोक्ताओं की आवश्यकताओं के अनुरूप नहीं थी। ये नवाचार मध्यप्रदेश में लिक्विड रिपेलेंट और स्प्रे श्रेणियों की लागत को 50 प्रतिश तक कम करते हैं और इस प्रकार उन्हें सभी के लिए सुलभ बनाते हैं। इन नवाचारों के साथ, हम कम आय वालें उपभोक्ताओं के लिए सुरक्षित मच्छर रिपेलेंट को सुलभ करा रहे हैं। देश के स्वास्थ्य बोझा को कम करने के सरकार के दृष्टिकोण का समर्थन करना हमारी बड़ी प्रतिबद्धता है।
जीसीपीएल देश में वेक्टर जनित रोगों के प्रभाव को कम करने के लिए प्रतिबद्ध है। गुडनाइट और हिट जैसे अपने प्रमुख ब्रांडों के माध्यम से, कंपनी ने पिछले कुछ वर्षों में सभी प्रारुपों में कई नवाचार पेश किए है।
2016 में जीसीपीएल ने 2030 तक मलेरिया उन्मूलन के भारत के राष्ट्रीय लक्ष्य के साथ अपना सीएसआर प्रयास, एलिमिनेशन ऑफ वेक्टर बॉन एंडेमिक डिजीज (एम्बेड) प्रोजेक्ट भी शुरु किया। यह कार्यक्रम पैâमिली हेल्थ इंडिया (एफएचआई) द्वारा एनजीओ भागीदारों और मध्यप्रदेश, उत्तर प्रदेश और छत्तीसगढ़ सरकार के स्वास्थ्य विभाग के सहयोग से लागू किया जा रहा है। एम्बेड का उद्देश्य अधिक बोझ वालें क्षेत्रों में मलेरिया, डेंगू और चिकनगुनिया के कारण रुग्णता और मृत्यु दर को कम करना है, अभी तक एम्बेड को मध्यप्रदेश के 9 जिलों, उत्तर प्रदेश के 4 जिलों और छत्तीसगढ़ के 2 जिलों के 2 हजार प्लस गांवों में 5 लाख से अधिक घरों में लागू किया जा चुका है।



