लापरवाह विकासखंड शिक्षा अधिकारीयों को हटाया जाये

जबलपुर दर्पण । मध्यप्रदेश अधिकारी कर्मचारी संयुक्त संगठन के जिला अध्यक्ष दिलीप सिंह ठाकुर के द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार जबलपुर जिले में सात तहसील एवं सात विकासखंड हैँ। प्रत्येक विकासखंड में एक सक्षम अधिकारी जिन्हें विकासखंड शिक्षा अधिकारी कहा जाता है, इनके द्वारा कई संकुल केंद्रों के पदस्थ /कार्यरत सैकड़ो शिक्षकों तथा कर्मचारीयों के वेतन एवं अन्य वित्तीय कार्य किये जाते हैँ।मध्य प्रदेश अधिकारी कर्मचारी संयुक्त संगठन के जिला अध्यक्ष दिलीप सिंह ठाकुर ने बताया कि अधिकांश विकासखंड शिक्षा अधिकारी कार्यालय में या तो स्टॉफ की कमी है या अनुभवी कर्मचारियों का अभाव है और तो और कई विकासखंड शिक्षा अधिकारी पूर्णतः अपने अधीनस्थ कर्मचारियों /लिपिकों /आउट सोर्स कंप्यूटर ऑपरेटर पर आश्रित हैँ इन्हें स्वयं से सिर्फ हस्ताक्षर करते बनता है।मध्यप्रदेश अधिकारी कर्मचारी संयुक्त संगठन के जिला अध्यक्ष दिलीप सिंह ठाकुर के अनुसार विकासखंड शिक्षा अधिकारी कार्यालयों में प्राथमिकता में वो कार्य किये जाते हैँ जिनमें ऊपरी कमाई हो जैसे एरियर्स का बिल, पेंशन प्रकरण इत्यादि। इस कार्यालय के सभी इन्हीं कार्यों में लिप्त रहते हैँ।माह के प्रारंभिक सात दिन भर कर्मचारियों के वेतन भुगतान में लगते हैँ शेष दिनों में बस यही कार्य करते हैँ। हर कोई विकासखंड शिक्षा अधिकारी बनने प्रयासरतरत रहता है क्योंकि ये मलाईदार पोस्ट है।मध्यप्रदेश शासन द्वारा सभी विभागों में कार्यरत सभी संवर्ग के कर्मचारीयों का वेतन प्रत्येक माह की 1 तारीख़ को दिया जाना सुनिश्चित किया है अन्य विभागों में लगभग 1 से 5 तारीख़ तक वेतन हो जाता है परन्तु शिक्षा विभाग में विकासखंड शिक्षा अधिकारीयों द्वारा ऐसा अनुपम कार्य नहीं किया जा रहा। कभी कभार संगठनों के दबाब में आकर किसी माह वे इस कार्य को कर देते हैँ परन्तु वर्ष भर हर माह 1तारीख़ को आज तक किसी भी विकासखंड शिक्षा अधिकारी ने अपने कर्मचारियों को वेतन नहीं दिया। पूछने पर रटा राटाया जबाब देते हैँ की सर्वर नहीं चल रहा, पोर्टल नहीं खुला, बिल जेनरेट नहीं हो पा रहे, लॉगिन नहीं हो रहा।
मध्यप्रदेश अधिकारी कर्मचारी संयुक्त संगठन के दिलीप सिंह ठाकुर,अरविन्द विश्वकर्मा,जी आर झारिया, भास्कर गुप्ता,दुर्गेश खातरकर,विश्वनाथ सिंह, ऋषि पाठक, आकाश भील, आदेश विश्वकर्मा, नितिन तिवारी, अजब सिंह, धर्मेंद्र परिहार, सुल्तान सिंह, इमरत सेन, देवराज सिंह,सुधीर गौर, मदन पांन्द्रो, मनीष झारिया,राशिद अली, विष्णु झारिया,चंद्रभान साहू, अंजनी उपाध्याय, कमलेश दुबे, पवन सोयाम, रामकिशोर इपाचे, रामदयाल उइके, डेलन सिंह, सुरेंद्र परसते, अनिल जैन,महेश मेहरा,गंगाराम साहू, भोगीराम चौकसे, अजय श्रीपाल, भागीरथ परसते, पूर्णिमा बेन, योगिता नंदेश्वर, प्रेमवती सोयाम, सुमिता इंगले,रेनू बुनकर, शबनम खान, पुष्पा रघुवंशी, चंदा सोनी, राजेश्वरी दुबे, गीता कोल, अर्चना भट्ट, सरोज कोल, ब्रजवती आर्मो,अम्बिका हँतिमारे इत्यादि ने माननीय मुख्यमंत्री जी, माननीय शिक्षा मंत्री जी, माननीय वित्त मंत्री जी एवं लोक शिक्षण संचालनालय, भोपाल तथा वरिष्ठ सक्षम अधिकारीयों से से ईमेल एवं दूरभाष पर चर्चा कर मांग की है, कि व्यवस्था में सुधार किया जावे और प्रत्येक माह 1 तारीख को कर्मचारियों का वेतन मिले तथा बिना लेनदेन के बाकी वित्तीय कार्य जैसे (पेंशन प्रकरण, एरियर्स बिल )हों, कर्मचारियों को अपने ही रूपये निकालने के लिए चढ़ोतरी ना चढ़ाना पड़े तथा ऐसे विकासखंड शिक्षा अधिकारीयों का पूरे वर्ष भर का रिकार्ड देखकर इन्हें हटाया जाये।



