भावांतर नहीं, सोयाबीन की खरीदी एमएसपी पर हो: भारतीय किसान संघ

जबलपुर दर्पण । मध्यप्रदेश देश का सबसे बड़ा सोयाबीन उत्पादक क्षेत्र है, लेकिन मौसम की मार और बाजार में दाम गिरने से किसान संकट में हैं। इसको लेकर भारतीय किसान संघ के प्रदेश अध्यक्ष कमल सिंह आंजना ने पत्रकार वार्ता में कहा कि प्रदेश सरकार द्वारा घोषित भावांतर योजना को किसान स्वीकार नहीं करेंगे।
उन्होंने बताया कि सोमवार को हुई प्रदेश स्तरीय बैठक में मालवा, मध्यभारत और महाकौशल प्रांत के पदाधिकारियों ने निर्णय लिया कि सरकार को केंद्र से आग्रह कर सोयाबीन की खरीदी न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर करानी चाहिए और पंजीयन प्रक्रिया तुरंत शुरू करनी चाहिए।
भावांतर योजना पर अविश्वास
किसान संघ का कहना है कि भावांतर योजना से किसानों को पहले भी नुकसान हुआ है। 2018 के भावांतर की राशि आज तक किसानों को नहीं मिली, जिससे किसान आक्रोशित हैं।
अतिवृष्टि व रोग से नुकसान का मुआवजा
श्री आंजना ने कहा कि अतिवृष्टि और पीला मोजेक रोग से सोयाबीन की फसल बर्बाद हुई है। ऐसे में प्रभावित किसानों की फसलों का तुरंत सर्वे कर मुआवजा राशि वितरित की जाए।
धान व मक्का की खरीदी की मांग
महाकौशल प्रांत महामंत्री प्रहलाद सिंह पटेल ने सरकार से चुनावी वादे के अनुसार धान को 3100 रुपए प्रति क्विंटल और मक्का को 2400 रुपए प्रति क्विंटल एमएसपी पर खरीदी करने की मांग रखी। वहीं बुंदेलखंड क्षेत्र में अतिवृष्टि से प्रभावित किसानों को बीमा राशि दिलाने की बात भी रखी गई।
आंदोलन की चेतावनी
प्रदेश अध्यक्ष आंजना ने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने भावांतर योजना निरस्त कर खरीदी को एमएसपी पर सुनिश्चित नहीं किया, तो प्रदेशभर के किसान भोपाल में बड़ा आंदोलन करेंगे।
बैठक में रहे उपस्थित
बैठक में प्रमुख रूप से क्षेत्र संगठन मंत्री महेश चौधरी, प्रदेश अध्यक्ष कमल सिंह आंजना, महामंत्री चंद्रकांत गौर, अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख राघवेन्द्र सिंह पटेल, राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य राजेंद्र पालीवाल, मालवा प्रांत संगठन मंत्री अतुल माहेश्वरी, प्रांत महामंत्री रमेश दांगी, भारत सिंह बैंस, योगेन्द्र भामू, मध्यभारत प्रांत अध्यक्ष सर्वज्ञ दीवान, प्रांत संगठन मंत्री भरत सिंह पटेल, प्रांत महामंत्री शिवनंदन रघुवंशी, नमो नारायण दीक्षित, महाकौशल प्रांत अध्यक्ष गजराज सिंह, संगठन मंत्री तुलाराम जी और प्रहलाद सिंह पटेल सहित कई पदाधिकारी मौजूद रहे।



