समर्थ सदगुरु का संदेश….

जबलपुर। पूंजीपति दबंग माफिया वन क्षेत्र को कर रहे खत्म जिससे तेज़ी से बढ़ रहा पृथ्वी का ताप-दाब। देश दुनिया का सूचना संपर्क व्यवस्था तंत्र पर खतरा उपग्रह सूचना कार्य प्रणाली हो रही प्रभावित। पृथ्वी व महासागरों का संतुलन बिगड़ा भीषण प्राकृतिक ताबाही आपदा के संकेत है। मां नर्मदा व पवित्र नदियों पर्वतों जंगलों का अंधाधुध दोहन शोषण हरित क्षेत्र जीवन क्षेत्र पर अतिक्रमण निर्माण बना। सबसे बड़ा महाविनाश का कारण नर्मदा घाटी वेदगर्भा के गर्भ गृह में छिपा दुनिया की घटनाओं का संबंध रहस्य ,सागर महासागर बने खतरनाक भीषण मानसून के केंद्र सागर से उठ रही महाविनाश की लहरें। सूर्य चंद्र मंगल गुरु शनि आदि ग्रह नक्षत्रों के स्वभाव में भी देखने मिल रहा रहस्यमयी परिवर्तन अकल्पनीय घटना के संकेत,ग्रहों पर छोड़े उपग्रह होंगे बंद दुनिया का संपर्क टूटने का खतरा बना है।
जीव जगत व्रह्माण्ड का समन्वय संतुलन प्रदान करने वाली क्रिया शक्ति मां नर्मदा है। नर्मदा घाटी पथ परिक्षेत्र से जुड़ा जीव जगत ब्रहमांड का गहरा सबंध नर्मदा घाटी में छिपा महापरिवर्तन काल नर्मदा मूल तत्व है। क्रिया शक्ति नर्मदा क्षेत्र में विगत दो दसकों से हो रहा अंधाधुंध दोहन अतिक्रमण छेड़खानी सबसे बड़ा कारण बन कर सामने आएगा। यदि हम आज नही चेते तो समय हमारी पीढ़ियां कभी माफ नही करेंगी। इन ताबाही आपदा संक्रमण महाविनाश के दोषी कलंक का कारण पीढ़ियां हमें बताएंगी। इन्ही सब कारणों के समाधान हेतु दादा गुरु विगत पांच माह से अधिक समय से अन्न आहार त्याग कर सत्याग्रह पम कर रहे हैं।
देश दुनिया व समूचे व्रह्माण्ड का गहरा संबंध माँ नर्मदा से है समन्वय संतुलन निर्माण संचालन नियंत्रण का केंद्र माँ नर्मदा ही है। जब दुनिया व जबाबदार जिम्मेदार जानकार इस सत्य तक पहुंचेगे तब तक शायद बहुत देर हो चुकी होगी। मां नर्मदा वेदगर्भा के गर्भ गृह में छिपे इन रहस्यों के संकेत देने का एक मात्र दादा गुरु का ध्येय है कि प्रत्येक भक्त प्रेमी इन घटनाओं के मूल कारण को जाने प्राकृतिक तबाही आपदा महामारी संक्रमण के कारणों को जाने एवं अपना योगदान सुनिश्चित कर सत्य की ओर कदम बढ़ाए।
प्रकृति केंद्रित जीवन विकास व्यवस्था ही एक मात्र देश दुनिया के लिए समाधान है।
प्रकृति संरक्षण सम्वर्धन और विकाश देश दुनिया प्रत्येक पंथ समुदाय को मिलकर करना होगा अब प्रयास धर्म सेवा व्यवस्था विकास के नाम पर चल रहा अंधाधुंध प्रकृति पवित्र नदियों अभ्यारण वन पर्वत मालाओं जल संग्रहण हरित क्षेत्रों को हर हाल में संरक्षित करना होगा यदि समय रहते हम संरक्षित नही कर पाए तो भीषण आपदा तबाही के केंद्र हमारे गांव नगर स्थान होंगे ऐसा समर्थ सद्गुरु नित्य कह रहे। सत्य की ओर कदम बढ़ाएं सच्चा धर्म निभाए।



