हनुमानजी की विशाल 108 फिट ऊँची एवं हनुमानजी की कलाग्नि रूप अदभुत प्रतिमा

जबलपुर दर्पण। चैतन्य सिटी तिलहरी जबलपुर में हनुमान वाटिका जो 2.5 एकड़ में बनी है, इसी वाटिका में 108 फ़ीट ऊंची बैठी मुद्रा में हनुमान जी की भव्य प्रतिमा स्थापित है, जो वास्तुकला की एक नायाब कलाकृति है। इसी हनुमान वाटिका में मंदिर के गर्भगृह में हनुमान जी की एक अद्भुत प्रतिमा स्थापित है, जो काले पत्थर की एक बहुमूल्य शिला से निर्मित है, हनुमान जी का ऐसा स्वरूप भारतवर्ष में कही भी देखने को नही मिलता है, हनुमान जी के इस स्वरूप को कलाग्नि हनुमान जी कहते है। हनुमान जी के इस स्वरूप की संक्षिप्त कथा ये है। जब हनुमान जी माता सीता की खोज में लंका पहुँचते है, अशोक वाटिका में उत्पात मचाते हुए उनका सामना मेघनाद से होता है, मेघनाद हनुमान जी को वश में करने के लिए उनपर ब्रम्हास्त्र चला देता है, हनुमान जी को किसी भी पाश में बांध पाना असंभव है, लेकिन रावण से मिलकर श्रीराम का संदेश देने के लिए वो सहज ही बंधे चले गए। रावण के दरबार मे पहुँचकर हनुमान जी ने श्रीराम का संदेश रावण को दिया, जिसके बाद रावण ने हनुमान जी का तुच्छ वानर, मर्कट जैसे शब्दों का उपयोग करके अपमानित किया, हनुमानजी सहज और शीतल होकर सब सुनते रहे, उसके बाद जब रावण ने श्रीराम के विषय मे अपमानजनक शब्द कहे, जिसे सुनकर हनुमान जी ने रावण को ललकारा और गुस्से में आकर रावण ने हनुमान जी की पूंछ में आग लगा देने का आदेश दिया और तब हनुमाजी ने अपनी ताकत से बंधन मुक्त होकर, कलाग्नि का रूप धरकर पूरी लंका में आग लगाकर लंका दहन कर दिये। लंका दहन करते समय काले धुएं के कारण हनुमान जी का पूरा शरीर काला हो गया, उनके इसी स्वरूप को कलाग्नि हनुमान जी कहते है।



