जबलपुर दर्पणमध्य प्रदेश

डी.पी.सी एवं बी.आर.सी के कार्य स्कूलों पर थोपे वरिष्ठ कार्यालय का कार्य करने मजबूर शिक्षक

किसी भी प्रकार की डाटा एन्ट्री, बी.आर.सी कार्यालय की जिम्मेदारी

जबलपुर दर्पण। मध्य प्रदेष जागरूक अधिकारी कर्मचारी संगठन के प्रांताध्यक्ष एवं जिलाध्यक्ष राॅबर्ट मार्टिन ने एक प्रेस विज्ञप्ति के माध्यम से बताया कि राज्य षिक्षा केन्द्र के द्वारा जारी पत्र क्रमांक /राषि/आई.सी.टी/2022-23 के अनुषार यूडाईस प्लस एवं डाटा के संकलन एवं सत्यापन हेतु राज्य षिक्षा केन्द्र के द्वारा डी.पी.सी एव ंबी.आर.सी कार्यालयों को आदेषित किया गया था जिसके अन्र्तगत सभी यूडाईस संबधित एन्ट्री एम.आई.एस (आॅपरेटरों) को करना चाहिए था जिसकी राषि भी राज्य षिक्षा केन्द्र के द्वारा इन कार्यालयों को भेजी जाती है। और कार्यालय द्वारा हार्ट काॅपी सभी स्कूलों को वितरित किया जाना था डाईस अनुसार जो की नहीं की गई। जिस वजह से वर्तमान में जिले के षिक्षक इन कार्यालयों के कार्य करने मजबूर हैं क्योंकि जो कार्य पहले वरिष्ठ कार्यालयों के द्वारा किए जाते थे वे सभी कार्य अब षिक्षकों के मत्थे थोप दिए जाते हैं। जैसे पहले सभी प्रकार के डाईस प्रपत्रों की डाटा एन्ट्री और मैपिंग, रजिस्ट्रेषन बी.आर.सी कार्यालयों के द्वारा पूंर्ण की जाती थी और जो भी कमी घटी होती थी उसको पूंर्ण कर सुधार कार्य भी किया जाता था। परंतु अब सभी कार्यों को षिक्षकों पर मड़ कर बी.आर.सी कार्यालयों के द्वारा पल्ला झाड़ लिया जाता है। जिससे षिक्षक मान्सिक प्रताड़ित है क्योंकि जहां एक समय में एक कार्य ही सही दिषा में किया जा सकता है वहीं षिक्षकों को मषीन की तरह पेरा जा रहा है जिस वजह से षिक्षक हैरान, परेषान और हलाकान है कि आखिर जो कार्य बी.आर.सी कार्यालयों और वहां पर पदस्थ आॅपरेटरों या फिर सी.ए.सी., बी.ए.सी का है वह कार्य षिक्षकों को करना पड़ रहा है आखिर क्यों ? यह बहुत बड़ा सवाल है जिस वजह से षिक्षकों में रोष व्याप्त है।
संघ ने आगे बताया कि पहले षिक्षकों को टेबलेट खरीदने एवं उसके भौतिक सत्यापन हेतु परेषान होना पड़ा। फिर एक तरफ परीक्षा में षिक्षक लगे हैं वहीं दूसरी तरफ मूल्यांकन के साथ रिज़ल्ट बनाना और दूसरी तरफ षिक्षकों को लाड़ली बहना योजना के अन्तर्गत लगा दिया गया जो कि आंगन बाड़ी कार्यकरताओं एवं महिला बाल विकास के कर्मचारियों को लगाया जाना चाहिए था वहीं षिक्षकों को परीक्षा के समय इस कार्य में लगा कर उलझा दिया गया और अब जब सभी स्कूलों का यू डाईस प्लस में सभी छात्रों की पूंर्ण जानकारी फीड करनी है जिसकी जिम्मेदारी पूंर्णतः बी.आर.सी कार्यालयों की है वह अब षिक्षकों से कराया जा रहा है जो कि अनुचित है क्योंकि जो षिक्षक पुराने हैं या फिर सेवानिवृत्ति के समीप है उन्हे न तो कम्प्यूटर का पूंर्ण ज्ञान है न ही उनसे मोबाईल या टेबलेट पर आॅनलाईन किसी भी प्रकार की एन्ट्री करते बनती है ऐसे में वरिष्ठ कार्यालयों द्वारा अपना कार्य षिक्षकों पर थोप देना समझ से परे है।
संगठन के जिलाध्यक्ष-राॅबर्ट मार्टिन, राकेष श्रीवास, हेमंत ठाकरे, एनोस विक्टर, रऊफ खान, शहीर मुमताज़, दिनेष गौंड़, स्टेनली नाॅबर्ट, अफरोज खान, गुडविन चाल्र्स, राजकुमार यादव, धनराज पिल्ले, सुधीर अवधिया, प्रदीप पटेल, मनीष मिश्रा, एस.बी.रजक, आर.पी.खनाल, अजय मिश्रा, फिलिप अन्थोनी, विनोद सिंह, गोपीषाह, उमेष सिंह ठाकुर, सुनील झारिया, रवि जैन, सुधीर पावेल, राॅबर्ट फ्रांसिस, आषाराम झारिया, अषोक परस्ते, योगेष ठाकरे, वीरेन्द्र श्रीवास, विजय झारिया, सुनील स्टीफन, वसीमुद्दीन, विनय रामजे, रामकुमार कतिया, सरीफ अहमद अंसारी, आषीष कोरी, कादिर अहमद अंसारी, अनूप डाहट, मानसिंह आर्मो आदि ने कलेक्टर महोद्य से मांग की है कि इन वरिष्ठ कार्यालयों को निर्देषित किया जाए कि जो कार्य इन कार्यालयों को करने है वे स्वयं करें

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