जबलपुर दर्पणमध्य प्रदेश

जातिगत जनगणना समय की मांग : जस्टिस वी. ईश्वरैया

दो दिन के राष्ट्रीय सामाजिक न्याय सम्मेलन के पहले दिन छाया रहा जातिगत जनगणना का मुद्दा

जबलपुर दर्पण । राष्ट्रीय सामाजिक न्याय सम्मेलन का उद्घाटन करते हुए मुख्य अतिथि राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग के पूर्व अध्यक्ष और पूर्व मुख्य न्यायाधीश आंध्र प्रदेश जस्टिस वी. ईश्वरैया ने कहा कि जातिगत जनगणना समय की मांग है। संविधान में सभी को समानता का हक़ है। देश कि 80 फीसदी आबादी को उसका वाजिब हक़ मिलाना चाहिए। उन्होंने कहा कि जातिगत जान गणना के आंकड़े न होने का बहाना कर ओबीसी के कल्याण की योजनाओं को टाल दिया जाता है। उन्होंने कहा कि हम एकजुट होकर जातिगत जनगणना के लिए प्रयास करें। सम्मेलन की अध्यक्षता कर रहे उत्तर प्रदेश के पूर्व लोकायुक्त और पूर्व न्यायाधीश जस्टिस वीरेंद्र सिंह यादव ने कहा कि कोलोजियम सिस्टम पिछड़े वर्गों के न्याय पाने के अधिकार से वंचित करने का तंत्र बनकर रह गया है। सम्मेलन के आरंभ में दादा बहादुर सिंह लोधी ने दो दिवसीय कार्यक्रम कि रूपरेखा बताई।डॉ. भीमराव अंबेडकर ने की पहली बार जातिगत जनगणना की मांग सम्मेलन में प्रमुख वक्ता के रूप में आए प्रो. हरि नरके ने कहा कि संवैधानिक व्यवस्था के अनुसार ओबीसी को उसका वाजिब हक़ नहीं मिला है। इस पर हमें गंभीरता से सोचना होगा। पहली बार जातिगत जनगणना करने की मांग 1946 में डॉ. भीमराव अंबेडकर ने की थी।कार्यक्रम का संचालन रामरतन यादव और डॉ. राजकुमारी बंसल ने किया। इस अवसर पर बैजनाथ कुशवाहा, रामकुमार पटेल, मूलचंद मौरे, राजकुमार सिंह किरार, इंद्र कुमार पटेल, नोखेलाल प्रजा, दिलीप पटेल, वृंदावन वर्मा, घनश्याम यादव, माया देवी कुशवाहा, गिरानी कुशवाहा, भगवानदास पटेल, सीताराम पटेल, देवकरण पटेल, एड. मनोज चौधरी, एड. राजकुमार यादव, एड. ओपी यादव, दालचंद रजक, जगदीश नन्हेट, अविनाश गाडवे, सरमन रजक, हरिशंकर विश्वकर्मा, एड. उदय साहू, एड. केके कुशवाहा, डॉ. रावत हरि पटेल आदि ने की है।यह सम्मेलन हाई कोर्ट के पास, पीएसएम कॉलेज ऑडिटोरियम जबलपुर में आयोजित किया जा रहा है। इस राष्ट्रीय सम्मलेन में देशभर के जाने-माने सामाजिक न्याय के वक्ता हिस्सा ले रहे हैं।सम्मलेन के दूसरे दिन 14 मई को ओबीसी, एसटी-एससी वर्ग के संवैधानिक अधिकारों पर कुठाराघात, जातिगत जनगणना, समानुपातिक प्रतिनिधित्व, निजीकरण का विरोध, ईवीएम पर रोक, कॉलेजियम सिस्टम, लागत के अनुसार कृषि उत्पादन का मूल्य, पुरानी पेंशन योजना लागू करने जैसे विषयों पर चर्चा होगी।

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