संपादकीय/लेख/आलेख

जिंदगी

जिंदगी तू हर रोज
एक नया सबक सिखाती है
इंसान को सारी परिस्थिति दिखाती है
सुख दुख है जीवन का संगम
जी लेता हर प्राणी यहां पर
लेकिन यहां इम्तिहान बहुत है

समुद्र जैसी इच्छाएं हैं
नदिया जैसी ख्वाहिशें है
मन बादल जैसा है सबका
बारिश जैसी फरमाइशें है
तारों जैसा ख्याल हम रखते
कहने को अरमान बहुत हैं

राहों पर राहें है, उनसे ऊपर चौराहे है
चलो राह चाहे पूरब पश्चिम
उत्तर हो चाहे फिर दक्षिण
बाधाएं सब ओर मिलेगी
जिन्हें पिलाते अपने ही यहां
बर्बादी के जाम बहुत हैं

कहने को तो सब ही सुनाते
अपनी अपनी सब ही गाते
छुप-छुप कर सब रो लेते हैं
बिना नींद के सो लेते हैं
नहीं सुना पाते हैं अंत तक
ऐसी भी फरमान बहुत है

जितने हैं अपमान यहां पर
पग पग पर सम्मान बहुत है
नारी का अपमान देखकर
छुप जाते हैं डरकर घर में
आज भी…….
सीता हरण को रावण जितने
उससे ज्यादा राम बहुत हैं।

 

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button

You cannot copy content of this page

situs nagatop

nagatop slot

kingbet188

slot gacor

SUKAWIN88