नया इंडिया भोपाल के संपादक जगदीप सिंह की स्मृति पर विशेष-हमने एक और कलमकार सिपाही को खो दिया
आधुनिक विचारों के कलमकार तथा पत्रकारिता मैं अपनी छाप छोड़ने वाले नया इंडिया भोपाल के संपादक जगदीप सिंह बेस आज हमारे बीच नहीं है. उनकी याद हमेशा हम सभी को आती रहेगी.जब-जब पत्रकारिता की बात उठेगी तब तब उनके नाम को याद करना ही पड़ेगा इसलिए नहीं की वह एक कलमकार थे,बल्कि इसलिए की पत्रकारिता के क्षेत्र में इतना सरल सहज और निर्भीक पत्रकार हम सभी को दुखित कर चला गया है. जगदीप सिंह से मेरा रिश्ता लगभग 10 वर्षों तक पत्रकारिता में रहा दैनिक नवभारत जबलपुर के प्रांतीय डेस्क में मैंने उनके साथ जो समय गुजारा वह यादगार पल कभी भुलाया नहीं जा सकता.इतना सरल और हंसी मजाक से बातें करने वाला कलम का सिपाही भले आज हमारे बीच ना हो पर उनकी याद जीवन भर आती रहेगी. मुझे अच्छी तरह याद है.जब इस कलमकार के साथ हम 1998 में सिहोरा के उस स्थान पर गए थे जो भारतवर्ष का मध्य क्षेत्र कहलाता है जहां जापान की कंपनी द्वारा बहु मंजिला इमारत का निर्माण होना था उसके भूमि पूजन में हम उनके साथ रिपोर्टिंग करने पहुंचे थे और बखूबी रिपोर्टिंग कर शाम तक अखबार के दफ्तर आ पहुंचे थे.ऐसे एक नहीं दर्जनो पल थे,जब हमने उनके साथ मौके पर पहुंचकर रिपोर्टिंग की और खूब मस्ती भी की. मैं उनके परिवार के सभी सदस्यों से वाकिफ हूं जितना मान सम्मान उन्होंने मुझे बड़े भाई के रूप में दिया उतना ही मान सम्मान मैं भी उनके परिजनों को देता रहा हूं. जब मुझे यह खबर लगी की जगदीप सिंह को ईटीवी में सेवा करने का मौका मिल रहा है तो उन्होंने अपने सभी वरिष्टों से इस संबंध में चर्चा की और यह पूछा की क्या मुझे नवभारत जैसे लीडिंग अखबार को छोड़कर वहां जाना उचित होगा या नहीं सभी ने कहा अवसर अच्छा है आप चले जाइए जगदीप ने सभी का मान सम्मान करते हुए ईटीवी भोपाल ज्वाइन किया और वहां से वह ट्रेनिंग के लिए हैदराबाद गए लगभग 6 माह हैदराबाद में प्रशिक्षण पूरा करने के बाद वह वापस भोपाल आए और ईटीवी में सेवाएं दी. लंबे समय इस चैनल में काम करने के बाद उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित नया इंडिया अखबार का हाथ थामा और वह देखते ही देखते नया इंडिया भोपाल के संपादक बन गए.इसके बाद भी उनकी पत्रकारिता का जुनून और लगन यहीं पर नहीं ठहरा और उन्होंने जबलपुर एडिशन खोलने के लिए मुझसे संपर्क किया. मैंने उन्हें जबलपुर आने का न्योता दिया और पूरी बातचीत होने के बाद 2018 में नया इंडिया संस्करण जबलपुर से प्रकाशित होने लगा इस दौरान जगदीप भाई ने कड़ी मेहनत की और पूरी लगन और मेहनत के साथ एडिशन के काम मैं जुट गए.जबलपुर की राजनैतिक और सामाजिक पृष्ठभूमि से उनका पुराना परिचय रहा है इसलिए जबलपुर के राजनैतिक समाचार हों या सामाजिक सभी विषयों को उन्होंने महत्व दिया और नया इंडिया को शहर में लोकप्रिय बनाने में सहायता की, लगभग एक वर्ष नया इंडिया परिवार ने काफी लगन और परिश्रम के साथ संस्करण को प्रकाशित किया लेकिन आर्थिक मंदी के चलते जैसा कि होता है, अखबार को बंद करना पड़ा इसके बाद भी जगदीप भाई ने हार नहीं मानी और वह लगातार भोपाल में बैठकर जबलपुर एडिशन का काम करते रहे सिर्फ इतना ही नहीं उन्होंने भोपाल में ही बैठकर इंदौर ग्वालियर जबलपुर तथा भोपाल के लिए काम किया, जगदीप भाई का व्यक्तित्व इतना सरल और सहज़ था कि हर व्यक्ति उनसे आसानी से जुड़ जाता था उन्होंने अपने कई लेखों के माध्यम से भविष्य की पत्रकारिता की आधारशिला रखने का सफल प्रयास किया और पत्रकारिता जैसे जिम्मेदारी भरे कार्य को और सरल बनाने में जीवन भर लगे रहे, जिससे युवाओं में पत्रकारिता के क्षेत्र में भविष्य बनाने की उत्सुकता बढ़ सके.सन 2024 में अचानक ही उनकी तबीयत में कुछ गिरावट आना शुरू हुई और वह धीरे-धीरे अस्वस्थता की ओर बढ़ते चले गए, दुर्भाग्य यह होगा कि जगदीप भाई अपने को संभाल नहीं पाए और हम सभी को व्यथित दुखित कर चले गए. हम उस कलम को कभी नहीं भूल पाएंगे जो निर्भीक सटीक निर्विवाद रूप से लिखते रहे. हम कभी सपने में भी नहीं सोच सकते की कलम का ऐसा सिपाही इतनी जल्द हम लोगों का साथ छोड़कर चला जाएगा.हम ईश्वर से प्रार्थना करते हैं की जगदीप सिंह बेस की आत्मा को शांति प्रदान करें तथा उनके परिजनों को इस दुख को सहन करने की शक्ति प्रदान करें.
वरिष्ठ पत्रकार-सुज्जल दास



