कन्या शालाओं में केवल महिला प्राचार्यों का पदाकंन किया जावे पदाकंन
जबलपुर दर्पण। मध्यप्रदेश अधिकारी कर्मचारी संयुक्त संगठन के जिला अध्यक्ष दिलीप सिंह ठाकुर द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार प्रदेश के समस्त शासकीय उच्चतर माध्यमिक कन्या शालाओं में केवल महिला प्राचार्यो की ही नियुक्ति की जाना चाहिए।
मध्यप्रदेश अधिकारी कर्मचारी संयुक्त संगठन के जिला अध्यक्ष दिलीप सिंह ठाकुर के अनुसार प्रायः देखा जाता है कि ऐसे अनेक मसलों, प्रकरण ,जटिल स्थिति निर्मित हो जाती है जहां पुरुष प्राचार्य पदस्थ होने से उनके सामने कुछ ऐसे विषय होते हैं जिन्हें चाह कर भी छात्राओं के गम्भीर मसलों पर चर्चा नहीं की जा सकती ।छात्राओं को भी पुरुष प्राचार्य के सामने अपनी-अपनी समस्याओं से अवगत करवाने में हिचकिचाहट महसूस होती है। अनेक बार पुरुष प्राचार्य भी अपने विचार व्यक्त करने में महिला शिक्षकों एवं छात्राओं के सामने विवशता महसूस करते हैं। अतः शासन प्रशासन से मांग है कि अतिशीघ्र समस्त शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालयों में केवल महिला प्राचार्यो का ही पदाकंन करें ताकि छात्राओं एवं महिला शिक्षकों को अपने-अपने पूर्ण विचार एवं समस्या बताने में हिचकिचाहट ना होवे।
मध्यप्रदेश अधिकारी कर्मचारी संयुक्त संगठन के दिलीप सिंह ठाकुर,जी आर झारिया, भास्कर गुप्ता,संजय उपाध्याय,अरविन्द विश्वकर्मा, शिवेंद्र परिहार,विश्वनाथ सिंह,ऋषि पाठक,आकाश भील, आदेश विश्वकर्मा, दुर्गेश खातरकर,शैलेश पंड्या, रवि विश्वकर्मा,माधव पाण्डेय,धर्मेंद्र परिहार, सतीश खरे, सुधीर गौर,संदीप भागवत,बैजनाथ यादव,सुरेंद्र परसते,अजय लोधी, दिलीप साहू, आशीष यादव, आशीष विश्वकर्मा,अजय श्रीपाल, महेश मेहरा, नितिन तिवारी, अजब सिंह,बहादुर पटेल, प्रशांत श्रीवास्तव, डेलन सिंह, अफ़रोज़ खान, रवि केवट, शिव यादव, ब्रजेन्द्र तिवारी, विशाल सिंह, देव सिंह भवेदी, संदीप परिहार,विवेक साहू,श्याम सुन्दर शुक्ला,पंकज हल्दकार, गगन पटेल,सुल्तान सिंह,इमरत सेन, भोजराज विश्वकर्मा, देवराज सिंह,चंद्रभान साहू, गंगाराम साहू, भोगीराम चौकसे, पवन सोयाम, रामदयाल उइके, रामकिशोर इपाचे, विष्णु झारिया, कमलेश दुबे, राशिद अली,राजेश्वरी दुबे,अर्चना भट्ट, मोदित रजक,भागीरथी परसते, सुमिता इंगले,रेनू बुनकर, कल्पना ठाकुर,अंजनी उपाध्याय,अम्बिका हँतिमारे, लोचन सिंह, ब्रजवती आर्मो, राकेश मून, संतोष श्रीवास्तव, आसाराम झारिया,समर सिंह,मनोज कोल,पुष्पा रघुवंशी,चंदा सोनी ,सिया पटेल, पूर्णिमा बेन, क्षिप्रा सिंह, दीपिका चौबे, शबनम खान, शायदा खान, योगिता नंदेश्वर, मनोरमा ठाकुर, अनुराधा नामदेव, संध्या पटेल, माया सोयाम, गीता कोल, सरोज कोल,प्रेमवती सोयाम,जया शुक्ला, सुनीता जॉर्ज इत्यादि ने उपरोक्त विषय पर गंभीर चिंतन की बात कही है तथा सुधार करने की मांग की है।



