बालाजी ढाबे के पीछे शासकीय जमीन पर प्रस्तावित है नक्शा,अमरावती रोड कलेक्ट्री भवन निर्माण के पीछे कौन?

पांढुरना जबलपुर दर्पण। तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने पांढुरना को जिला बनाने कोई कौर कसर नहीं छोड़ी उन्होंने वादा की और पूरा किया और निभाया भी अब उन्हें क्या पता था कि भाजपा की सरकार के नौकरशाह उनके विचारों पर अपनी तानाशाही पूर्वक लोक हित का नहीं लोगो को परेशानी में डालने का निर्णय करेंगे।
पांढुरना जिले के कलेक्ट्री भवन नियम का फंसा पेच
सूत्रों की माने तो राष्ट्रीय राजमार्ग 47 पांढुरना से सिवनी के बीच बालाजी ढाबे के पीछे शासकीय जमीन पर प्रस्तावित होना बताया जा रहा है और तत्कालीन कलेक्टर ने इसकी प्रकिया पूर्ण कर नक्शा तैयार कर अमरावती रोड वीरशैव लिंगायत मठ उर्फ़ गणपति मठ संस्थान से पांढुरना प्रशासन को दान में मिली जमीन पर कलेक्ट्री भवन निर्माण करने के पीछे कौन लोग है यह तो तत्कालीन कलेक्टर ही जाने?
मिली जानकारी के अनुसार सरकार के रिकॉर्ड में अभी भूखंड चिह्नित नहीं हो पाया है प्रशासनिक स्तर पर वर्तमान में पांढुरना कलेक्ट्री भवन निर्माण का नक्शा नागपुर सड़क पर स्थित शासकीय भूखंड पर बना होने की बात सामने आई है और नक्शे के विपरीत दिशा अमरावती सड़क पर कलेक्ट्री भवन निर्माण होना एक नया मोड सामने आया है।
देखा जाए तो लोक हित का निर्णय नहीं है चुकी नगरीय ग्राम निवेश विभाग के भविष्य के प्लान के हिसाब से 8 किमी की दूरी पर होगा। कलेक्ट्री भवन निर्माण की बात सामने आ रही थी।तो आम जानो के साथ कांग्रेस के विधायक विजय चौरे ने तत्कालीन कलेक्टर अजयदेव शर्मा को लोक हित के विरुद्ध निर्णय करने का आरोप जड़े थे। इस बीच शासन स्तर पर उनका स्थानांतरण हुआ। इस पूरे मामले अब आम जानो की मांग नवागत कलेक्टर नीरज वशिष्ठ से है कि लोक हित में निर्णय कर जिला कलेक्ट्री कार्यालय बनाए और पिछले निर्णय पर गंभीर चिंतन करना आवश्यक है।
पांढुरना के साथ जिला बना मैहर में शहर से सात किलोमीटर दूर जमीन मिली थे।इस प्रस्ताव को तत्कालीन मुख्य सचिव इकबाल सिंह बैंस ने निरस्त कर देने की बात सामने आई है।उनका तर्क था कि शहर से दूर कलेक्टर कार्यालय भवन बनाए जाने से लोगों को आने-जाने में दिक्कत होगी। अब वहा पर नई जमीन की तलाश की जा रही है।



