शासन में बैठे मंडी बोर्ड अधिकारियों का फरमान जारी मंडी व्यापारी इस स्थानांतरित पर किसान लाभ बंद होने की कगार पर

जबलपुर दर्पण। कृषि उपज मंडी समिति शासकीय योजनाओं का लाभ शहर के व्यापारियों व ग्रामीण क्षेत्र के लोगों को नहीं मिल रहा है जबकि शासन की शान व्यापारियों की समस्याओं को राहत दिए जाने हेतु अनेक घोषणाओं कर मात्र दिखावा कर रही है और उनके झूठी आश्वासन ओके बाय दे जनता के सामने उजागर हो रहे हैं जिसे आम नागरिक व्यापारी नजरअंदाज नहीं कर रहे हैं दे अब नाक बंद होने की भूमिका बना रहे हैं क्योंकि जब शासन के वरिष्ठ अधिकारी मंडी बोर्ड में बैठे हैं तो इनकी समस्या का समाधान क्यों नहीं किया ज्यादा केवल दे वसूली और बंद कमरे एसी कूलर में बैठकर आराम फरमाते हैं
आज वहीं दूसरी ओर कदमा फूल भोपाल से आए अधिकारियों ने एक फरमान जारी कर मंडी व्यापारियों व छोटे-छोटे सब्जी व अन्य खाद्यान्न सामग्री बेचने मार्लों में बेचैनी बढ़ा दी है सन 1971 में कृषि उपज मंडी का निर्माण हुआ था जब से वहां पर आज तीन मंडी आलू प्याज से लेकर सब्जी मंडी फल मंडी एवं गल्ला मंडी का अच्छा व्यापार चल रहा है कृषि उपज मंडी को शहर से बाहर ले जाकर अनियंत्रित स्थान में स्थानांतरित करने से व्यापारी किसान व छोटे-मोटे दुकानदारों एवं आम नागरिकों को काफी मुसीबतों का सामना करना पड़ेगा इस शहर में व्याप्त रोज बढ़ने लगा हैं कृषि उपज मंडी का एरिया आज 550 एकड़ की जमीन पर फैला हुआ है जहां लगभग 6500 व्यापारी किसान अपना व्यवसाय मंडी प्रांगण में चला रहे हैं और वे शासन को अभी दे रहे हैं उसके बावजूद भी वहां कोई व्यवस्था नहीं है जिसके कारण में रोज व्याप्त है व्यापारी संघ ने एक मुलाकात में बताया कि यहां ना पानी व्यवस्था है और ना ही साफ सफाई की पूर्व सचिव मनोज चौकी करने अपनी कार्यकाल में मंडी प्रांगण में कभी व्यापारियों के बीच बैठकर उनकी होने वाली समस्याओं एवं कैंपस के अंदर गंदगी की ओर कभी ध्यान नहीं दिया एवं आवारा जानवर मंडी के अंदर घुस कर गंदगी व व्यापारियों को नुकसान पहुंचाते हैं जिसकी शिकायत सब्जी मंडी व्यापारियों ने मोबाइल पर कई बार फोटो मैसेज भेज कर शिकायत दर्ज आई थी परंतु देखी बस इसी कमरे में बैठकर आराम फरमा कर चले जाते थे
मणिपुर सचिव मनोज चौकी कार्य को शिकायत के आधार पर जबलपुर से बाहर ट्रांसफर शासन ने गत माह पूर्व किए थे परंतु देश फेवीकोल लगाकर सीट से निकलने का नाम नहीं दे रहे थे परंतु कोर्ट का झंडा पड़ने पर ही उन्हें सीट छोड़नी पड़ी और फिर शासन के आदेशानुसार आर के संयम मंडी सचिव पर पदस्थ हुए मनोज चौकी कर ऑफिस कार्यालय में कभी कबार दर्शन देने पहुंच जाते थे पत्रकार सभी व्यापारी किसानों आम नागरिकों की समस्या के संबंध में चर्चा चर्चा करने हेतु जाते थे तो भी सीट पर बैठने के बावजूद भी मीटिंग का बहाना बताकर भाग जाते थे और फिर मिलते ही नहीं थे इस तरह मंडी में उनका कार्यकाल रहा जबकि वे प्रशासनिक अधिकारी रहे|
जबलपुर शहर की इतनी बड़ी मंडी में आज जब व्यापारियों किसानों का व्यापार धंधा अच्छा चल रहा है तो इसको अनर्थ इतना अंतरित करने का क्या औचित्य जबकि वे शहर में ट्रैफिक नियमों का भी पालन करने को तैयार हैं मंडी में आज इतनी जगह खाली पड़ी है जिसकी देखभाल करने वाला शासन का कोई अधिकारी नहीं ढंग से अपने पद का निर्वहन नहीं करना चाहता उसके कारण ऐसे हालात उत्पन्न हो रहे हैं उक्त कारण व शहर की हालत चरमरा जाएगी और अधिकारी भूख दर्शक बने केवल आराम फरमाते रहेंगे|
शासन में बैठी वरिष्ठ अधिकारियों को चाहिए कि वे कहीं आसपास बाईपास के पास ऐसी मंडी की जगह तलाश करें जिसमें किसान व्यापारी व छोटे-मोटे व्यापार करने वालों को राहत मिल सके व्यापारी संघ ने यह भी कहा कि उन्हें बिना पूछे या निर्णय लिया गया ना ही कोई नोटिफिकेशन दिया और ना ही बालाजी केबल बड़े कमरे में बैठकर अधिकारियों ने गुपचुप में न ले लिया जो संदेश पद है|



