अध्यात्म/धर्म दर्पणजबलपुर दर्पणमध्य प्रदेश

201 कांवड़ियों ने नंदीकेश्वर मंदिर बरगी नगर में किया नर्मदा जल से अभिषेक

जबलपुर दर्पण। सावन के तीसरे सोमवार ग्राम बरगी से सार्वजनिक समिति एवं ग्रामीणों द्वारा बरगी नगर स्थित नंदकिशोर मंदिर मैं किया नर्मदा जल अभिषेक भोलेनाथ के भक्तों द्वारा बरगी से सालीवाडा जाकर मां नर्मदा के घाट से अपने अपने कंधों में नर्मदा जल लेकर पैदल नंदीकेश्वर मंदिर के लिए प्रस्थान किया कांवड़ यात्रा में बच्चे महिलाओं पुरुषों एवं बुजुर्गों द्वारा बढ़ चढ़कर हिस्सा लिया गया यह यात्रा लगभग 15 किलोमीटर नर्मदा तब से अपने अपने कांधे पर कांवर में नर्मदा जल भरकर शुरू हुई कावड़ियों द्वारा बताया गया कि जगह जगह पर लोगों द्वारा चाय पानी फल फूल की व्यवस्था कर भव्य स्वागत किया गया लगभग कावड़ यात्रा में 500 से 600 लोगों की उपस्थिति रही पहलाद यादव एवं युवराज सिंह ने बताया कि यह कावड़ यात्रा 3 वर्षों से बरगी से निकाली जाती है हम लोग पर्व की तरह मनाते हैं क्षेत्रीय लोगों में कावड़ यात्रा को लेकर बड़ा उत्साह रहता है यह काम वाली यात्रा का शुभारंभ प्रहलाद यादव युवराज सिंह शुभम रजक गगन प्रधान अनुराग बर्मन कनिका मजूमदार आरती साहू यशवर्धन राजपूत दिनेश राजपूत आदि लोगों के द्वारा किया गया था मुट्ठी भारत कांवड़ियों की संख्या आज 300 कांवरिया में तब्दील हो गई है

जबलपुर शहर से आए हिमांशु शुक्ला जी ने बताया तीसरे सावन सोमवार वह नंदीकेश्वर मंदिर में आए हुए हैं मंदिर का इतिहास बताते हुए कहा कि जय मंदिर बरगी बांध बनते समय डूब में आ गया था समय मंदिर को विस्थापित कर ग्वाल टेकरी में स्थापित किया गया था नंदी की प्रार्थना से प्रकट हुए शिव का नाम नंदीकेश्वर पड़ा यहां नंदी शिव के साथ साक्षात रूप में विराजमान हैं शिवजी के दाएं हाथ में पार्वती जी एवं बाएं हाथ में हनुमान जी विराजित हैं भगवान शंकर अपने परिवार के साथ मंदिर में विराजित हैं अतः श्रद्धालुओं एवं भक्तों से आग्रह है कि नंदीकेश्वर मंदिर में आए और धर्म का लाभ उठाएं

ग्राम बरगी से आए हुए संतोष ने परिहार और नंदू भैया ने बताया कि मंदिर में जो शिवलिंग है वह प्राचीन शिवलिंग है नंदीकेश्वर मंदिर का पुराना इतिहास रहा है 201 कांवरियों ने आज तीसरे सावन सोमवार में हिस्सा लिया नर्मदा तट से जल अपनी अपनी कावर में लेकर पैदल नंदीकेश्वर मंदिर पहुंचे जगह-जगह कावड़ियों का भव्य स्वागत किया गया लोगों द्वारा जगह-जगह चाय पानी एवं फल फूल की व्यवस्था की गई|

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