जबलपुर दर्पण

तराजू के दो पल्लों में पिसता किसान

पोर्टल बंद, रजिस्ट्रेशन अटका और भुगतान लंबित—क्यों जवाब नहीं दे पा रहा जिला प्रशासन?

मनीष श्रीवास जबलपुर दर्पण। जबलपुर जिले में किसानों की उपज धान खरीदी का मामला दिनों दिन तूल पकड़ता हुआ नज़र आ रहा हैं। बीते 1 वर्ष पीछे 24 – 25 में जहां धनवाही मां रेवा वेयर हाउस में 90 से अधिक किसानों का भुक्तान 1एक करोड़ 39 लाख के लगभग नहीं दिया गया है। इस वेयरहाउस में और भी अनियमिताएं होने को लेकर जिला प्रशासन के द्वारा एफआईआर दर्ज कराई गई थी। जिसमें कुछ लोगों की गिरफ्तारी एवं जुर्माना के साथ उन्हें जमानत भी दी गई । अब सवाल एक बार फिर श्रीजी वेयरहाउस ग्राम पिपरिया वेयरहाउस का तूल पकड़ने लगा। यहां 29 जनवरी को हमारी मीडिया टीम ने जब श्रीजी वेयरहाउस में जाकर देखा तो सहकारी समिति मझौली के उपार्जन केंद्र क्रमांक 59 33 622 के क्रमांक 1 में किसानों की धान उनकी तौल ऑपरेटर के पास जमा पर्ची के साथ-साथ रजिस्टर में दर्ज किसानों के कांटा पर्ची कटा एवं उपार्जन केंद्र के पोर्टल को दिनांक 13 .01.2026 जनवरी को अचानक बंद कर किए जाने से रुके हुए किसानों के भुगतान एवं पोर्टल में नाम रजिस्ट्रेशन से स्थानीय ग्रामीण किसान चिंतित और परेशान नजर आए।
हमारे प्रतिनिधि मीडिया के समक्ष भारतीय किसान संघ महाकौशल प्रांत के तहसील अध्यक्ष मझौली वीरेंद्र पटेल ने एवं तहसील मंत्री रंजीत पटेल की उपस्थिति में सहकारी समिति के द्वारा किए गए किसानों की धान खरीदी को पोर्टल में चढ़ने एवं भुगतान के संदर्भ में बीते दिवस जिला कलेक्टर राघवेंद्र सिंह की उपस्थिति में श्रीजी वेयरहाउस में किसानों के भुगतान एवं पोर्टल में नाम दर्ज करने को लेकर विस्तार पूर्वक चर्चा एवं वार्तालाप की ।

जिले में क्यों उठा 174 फर्जी किसान का मामला – किसानों ने यह भी बताया कि इस क्षेत्र के 174 किसान फर्जी एवं गलत पाए गए हैं। एसा जिला प्रशासन का मानना।
अब सवाल उठता है ? कि जिला प्रशासन के द्वारा शुरुआती धान की खरीदी से लेकर अंतिम दिवस तक सी सी डी कैमरे की निगरानी,अपर कलेक्टर, जिला अधिकारी, कृषि खाद्य अधिकारी एवं ग्रेडर निरीक्षण सहित कोटवारों की भी ड्यूटी यहां लगाई गई थी । साथ ही शासन प्रशासन के द्वारा दो पारियों में खरीदी का कार्य रखा गया था । पहली पारी में महिला समूह के द्वारा खरीदी कराई गई। तो वहीं दूसरी पाली में सहकारी समितियों द्वारा खरीदी कराई गई । इन खरीदी केंद्रों में अहम भूमिका पूर्ण रूप से जिला प्रशासन और स्थानीय प्रशासन की थी । उसके बावजूद भी लगातार जब इन किसानों के द्वारा समय रहते ही रजिस्ट्रेशन के लिए पहुंचते थे तो कभी उन्हें पोर्टल बन्द का हवाला तो कभी सॉफ्टवेयर नेटवर्क के प्रॉब्लम को लेकर आगे बढ़ा दिया जाता। किसान बेचारे मजबूर होकर उस बनाए गए सिस्टम और पोर्टल में चक्कर काटते नजर आए । जिससे आज दिनांक तक ना तो इनके पोर्टल में नाम दर्ज हो पाया ना ही इनका खरीदी का भुगतान।
स्थानीय किसानों द्वारा मीडिया के समक्ष दिखाई अपनी धान की खरीदी पर्ची एवं कुल कुंटल धान रजिस्ट्रेशन कोड – रजनी रैकवार पति चंदू रैकवार निवासी लुहाड़ी जिनके द्वारा 12 जनवरी 2026 को धान खरीदी पर्ची किसान कोड 22 233 0041303 में कुल भुगतान 663,32 राशि बाकी। तुलसीराम शर्मा निवासी मडला कुल धान इनकी 155 कुंटल 20 किलो, खेम करण पिता कंधीलाल धान 225 कुंटल 20 किलो । श्यामलाल पिता जीवनलाल निवासी लड़ाई किसान कोड 25233 290071 कुल भुगतान राशि 59698 ,राजेश कुमार भट्ट पिता कमल प्रसाद निवासी तक बिहार जिनका रजिस्ट्रेशन 5 जनवरी 2026 कुल भुगतान शेष 19 0467 राशि बाकी। वहीं 21 जनवरी को मझौली तिराहे पर किसानों ने अपनी मूल मांगों को लेकर धरना प्रदर्शन भी किया गया था। जिसमें इन्हें आश्वासन दिया गया था कि एक सप्ताह में आप की समस्या का निदान कर दिया जाएंगा।
इसके साथ साथ ही भारतीय किसान संघ के द्वारा 30 से 35 किसानों के किसान रजिस्ट्रेशन कोड उनका नाम एवं मोबाइल नंबर सूची जिला प्रशासन को पत्र के माध्यम से जिला समक्ष आवेदन के रूप में प्रस्तुत किया गया था।
भारतीय किसान संघ और कलेक्टर के बीच क्यों हुई चर्चा – कलेक्टर राघवेंद्र सिंह और भारतीय किसान संघ महाकौशल प्रांत जिला जबलपुर के पदाधिकारियों के द्वारा 27 जनवरी 2026 की दोपहर एक बैठक सम्पन्न हुई। इस बैठक के दौरान भारतीय किसान संघ के पदाधिकारी चर्चा करते हुए माॅग रखीं कि धान भुगतान शीघ्र किया जावे। तहसीलों के कुछ वेयरहाउस बंद कर दिए गए हैं, फर्जी कहे गए किसानों की जांच कर, सही किसानों की धान पोर्टल पर चढ़ा कर धान विक्रय का भुगतान तुरंत किया जावे। राजस्व विभाग के सभी तहसीलों में किसानों ,फौती, नामांतरण,बटवारा,जैसी समस्याओं का निदान तत्कालीन किया जाए।
किसानों की पीड़ा क्षेत्रीय विधायक एवं जिला शासन प्रशासन के संज्ञान में होते हुए भी इन किसानों को आज के टेक्नीशियन दौर में क्यों परेशान होना पड़ रहा है यह बड़ा ही गम्भीर और प्रश्ननिय सवाल है? अब देखते हैं क्या इन किसानों की समस्या जस की तस रहेगी या फिर जिला प्रशासन द्वारा इन किसानों को तत्कालीन भुगतान कर उनकी समस्याओं का निदान कर पाएंगे। साथ ही जिन भी किसानों का भुगतान रोका गया है उस में क्या शक्ति दिखाई देगी यह तो आने वाला समय ही बता पाएगा।

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