जबलपुर मेट्रों से भोपाल बंसल हॉस्पिटल तक बना ग्रीन कॉरिडोर, ब्रेन डेड मरीज का लिवर लेकर भोपाल रवाना हुई टीम


जबलपुर दर्पण। मेट्रो हॉस्पिटल से डुमना एयरपोर्ट तक और भोपाल एयरपोर्ट से बंसल हॉस्पिटल तक गुरुवार को ग्रीन कॉरिडोर बनाया गया है। जबलपुर के मेट्रो हॉस्पिटल में भर्ती एक ब्रेन डेड मरीज का लिवर भोपाल में भर्ती मरीज को ट्रांसप्लांट किया जाना था। जिस मरीज का लिवर लेने के लिए भोपाल से डॉक्टर्स की टीम जबलपुर पहुंची है। बंसल हॉस्पिटल के मैनेजर लोकेश झा ने बताया कि मेट्रो हॉस्पिटल में ब्रेन डेड घोषित किए गए एक 64 वर्षीय मरीज के परिजन ने लिवर डोनेट किया है। उसके लिवर को लेने भोपाल से बंसल हॉस्पिटल के डॉक्टर्स की टीम जबलपुर मेट्रों अस्पताल पहुंची है। उन्होंने बताया कि डॉक्टर्स को जबलपुर से आर्गन लाने के लिए सीएम शिवराज सिंह चौहान ने हेलिकॉप्टर मुहैया कराया है। भोपाल में बंसल हॉस्पिटल के डॉ. गुरुसागर सिंह सहोटा, लिवर ट्रांसप्लांट सर्जन, पूरे ऑपरेशन को लीड कर रहे हैं। जबलपुर में एक से डेढ़ घंटे में लिवर को सर्जरी कर निकाला गया। डॉ. गुरुसागर सिंह सहोटा, लिवर ट्रांसप्लांट सर्जन, पूरे ऑपरेशन को लीड कर रहे थे। आर्गन डोनेट करने की इच्छा मेट्रो हॉस्पिटल जबलपुर के डॉ. सौरभ बड़ेरिया ने बताया कि 19 सितंबर को एक 64 वर्षीय मरीज भर्ती हुआ था। उसे ब्रेन ट्यूमर था। अस्पताल में दिए गए इलाज के बाद भी उसकी सेहत में सुधार नहीं हुआ। 20 सितंबर की सुबह मरीज ब्रेन डेड हो गया था। मरीज के परिजनों ने ब्रेन डेड पेशेंट के आर्गन डोनेट करने की इच्छा जताई थी। इस पर डॉक्टर्स की टीम ने तय प्रोटोकॉल के तहत नेशनल आर्गन एंड टिशु ट्रांसप्लांट आर्गेनाइजेशन एनओटीटीओ को आर्गन डोनेशन की सूचना दी गई थी। एनओटीटीओ से अप्रूवल मिलने के बाद अब मरीज का लिवर, दूसरे मरीज को ट्रांसप्लांट करने के लिए भोपाल भेजा जाएगा। बंसल अस्पताल से लिवर ट्रांसप्लांट सर्जन डॉक्टर गुरुसागर सिंह सहोटा ने बताया कि हम सभी अभी एक लिवर ट्रांसप्लांट के लिए जबलपुर से भोपाल रवाना हुए । इसके लिए मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने हमारी मदद की है। वह अपना हेलिकॉप्टर ऑर्गन लेने के लिए भेजा था। आर्गन आने के बाद सर्जरी की जाएगी।

राजीव सराफ को इसी साल 27 मार्च में ब्रेन ट्यूमर डिटेक्ट हुआ था। जबलपुर के रहने वाले पीयूष सराफ ने बताया कि उनके मामा जी राजीव सराफ को इसी साल 27 मार्च में ब्रेन ट्यूमर डिटेक्ट हुआ था। नागपुर के हॉस्पिटल में 29 मार्च को सर्जरी हुई थी। इसके बाद वह रिकवर हो गए थे। लेकिन 19 सितंबर को राजीव सराफ को ब्रेन स्ट्रोक हुआ। इसके बाद इलाज के लिए मेट्रो हॉस्पिटल में भर्ती कराया था। लेकिन, वह रिकवर नहीं हुए। बल्कि ब्रेन डेड हो गए। इसके चलते परिजनों ने मामा (राजीव सराफ) के आर्गन डोनेट करने का फैसला किया। ताकि उनके मामा के आर्गन से दूसरे व्यक्ति को जिंदगी मिल सके। पीयूष, राजीव सराफ मूल रूप से बैतूल के रहने वाले थे।



