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ह्रदय की चेतना जागृत करने मात्र से दुखो का शमन : आचार्य राघवेन्द्र

जबलपुर दर्पण। मन को गोपी सदृश रख आराधन करने से श्रीकृष्ण सहज प्राप्त हो जाते है। हर्ष आनंद की प्राप्ति के लिए प्रयास के साथ भगवत भक्ति आवश्यक है। श्रीहरि नारायण का नाम संकीर्तन व कथा श्रवण करने मात्र से मोक्ष प्राप्त होता है। ह्रदय की चेतना जागृत करने मात्र से सभी भौतिक विषादो का शमन हो जाता है। भारत पौराणिक भूमि है। परमात्मा के अंलकरित स्वरूप पर मोहित होना ही महारास है। ये भावुकतापूर्ण उदगार व्यास आचार्य राघवेन्द्र तिवारी जी ने श्री राधा रमण मंदिर रतन नगर कॉलोनी गुप्तेश्वर मे श्री रूक्मणी कृष्ण मंगल विवाहोत्सव पर कहे। श्रीमद्भागवत ज्ञान यज्ञ एवं संत समागम मे महामंडलेश्वर कौशल किशोर दास जी (छावनी अयोध्या) हरि के विचरण की भूमि मे नारायण का चिन्तन मनन करने से सभी सुखो की प्राप्ति होती है। नरसिंहपीठाधीश्वर डा स्वामी नरसिंह दास महाराज ने कहा वर्तमान मे वैदिक सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण के लिए कथा पुराण, भगवत भक्ति आवश्यक है। भागवत भगवान का श्री वांग्मय स्वरूप है। डा स्वामी राधे चैतन्य जी महाराज, आचार्य अनूप देव शास्त्री का सनिध्य और आशीर्वचन प्राप्त हुए। कथा यजमान पं छोटे लाल तिवारी, कृष्णा देवी नागर ,शोभना तिवारी, प्रमोद नागर, रंजना केशरवानी, कृष्णा गणेश झरिया, ममता सिन्हा ने श्री राधा रमण जी व्यास पीठ श्रीमद्भागवत जी का पूजन अर्चन किया।

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