समरसता सेवा संगठन ने छत्रपति शिवाजी महाराज की जयंती पर किया सम्मान समारोह का आयोजन

जबलपुर दर्पण। छत्रपति शिवाजी महाराज की जन्म जयंती है और शिवाजी महाराज समरसता के वाहक, पोषक और प्रहरी है। उन्होंने समरसता को वहन किया, उसे आगे बढ़ाते हुए पोषण किया और उसे बचाने के लिए प्रहरी के रूप में कार्य किया यह बात प्रो. श्रीमती माला प्यासी ने समरसता सेवा संगठन द्वारा छत्रपति शिवाजी महाराज की जयंती पर आयोजित विचार गोष्ठी एवं सम्मान समारोह के अवसर पर रानी दुर्गावती कला वीथिका सभागार में कही। कार्यक्रम मुख्य अतिथि प्रेरक एवं शिक्षाविद श्री दीपक दिवेदी, प्रमुख वक्ता सेवानिवृत प्रो. माला प्यासी, वरिष्ठ पत्रकार नलिनकांत वाजपेई, समरसता सेवा संगठन के अध्यक्ष संदीप जैन की गरिमामय उपस्थिति में आयोजित हुआ। मुख्य अतिथि श्री दीपक दिवेदी ने विचार गोष्ठी को संबोधित करते हुए कहा विचार कोई नया विचार नहीं है। चारो वेद में छुआछूत की बात कही नही है। इतिहास में सभी वर्गो को शासन करने का अधिकार दिया, हर वर्ग को महत्व दिया जाता था किंतु मध्य काल में यह विचार बाहरी आक्रमणों से खो गया।
उन्होंने कहा हम संगठित नहीं रहेंगे तो समाज आगे नहीं बढ़ सकता है। और समाज को संगठित करने और समरसता के भाव को जागृत करने का कार्य छत्रपति शिवाजी महाराज ने अपने शासन में किया। शिवाजी महाराज ने अपने शासन में स्व की चेतना जगाई, सोए हुए हिंदुओ को जागृत करने का कार्य उस समय की प्रतिकूल परिस्थितियों में किया। शिवाजी ने मात्र 16 वर्ष की आयु में पहला किला जीता और उसके बाद लगातार समरसता के भाव से सभी को एकजुट करते हुए सेना तैयार की और मुगलों पर विजय प्राप्त की और देश के हिंदू चेतना को जागृत करने का कार्य किया। उन्होंने कहा शिवाजी ने 350 साल पूर्व स्वराज्य, स्वदेशी, स्वधर्म, स्वभाषा को महत्व दिया और उन्होंने अपने शासन में सही व्यक्ति को सही पद को देने का कार्य करते हुए स्वराज्य की स्थापना की। समसरता जैसे संगठन का निर्माण ही राष्ट्रनायक के निर्माण के लिए ही हुई है।
मुख्य वक्ता प्रो .श्रीमती माला प्यासी ने विचार गोष्ठी को संबोधित करते हुए कहा समरसता बड़ा अच्छा शब्द है यह दो शब्दो से बना है सम और रसता। सम मतलब समता, और रस को कई अर्थों में परिभाषित कर सकते है। जीवन का रस ऐसा ही है सुख और दुःख दोनो आते है। उन्होंने कहा सौभाग्य है कि जीजा बाई जैसी माता ने शिवाजी को जन्म दिया और मेरा मानना है हर माता में जीजा बाई होती है जो अपने बच्चे को शिवाजी ही बनाना चाहती है। शिवाजी ने ऐसी युद्ध नीति बनाई जो अत्यंत सफल हुई।
विचार गोष्ठी में संगठन के अध्यक्ष संदीप जैन कहा राष्ट्र, धर्म और अनुशासन सर्वोपरि है और शिवाजी महाराज के जीवन चरित्र में यह सभी गुण उपस्थित थे। आज पूज्य संत विद्यासागर जी महाराज ने भी भौतिक जीवन से गमन किया है और उन्होंने भी सर्व समाज के कल्याण की कामना की थी। समरसता सेवा संगठन का उद्देश्य हम सब एक सूत्र में एक साथ एक दिशा में चले और समरस भारत और समर्थ भारत के निर्माण में योगदान दे सके और इसीलिए सब सबको जाने और सब सबको माने के विचार को लेकर हम कार्य कर रहे है।आप सभी के स्नेह और आशीर्वाद से हम आगे बढ़ते रहेंगे।
वरिष्ठ पत्रकार नलीनकांत वाजपई ने भी अपने विचार व्यक्त किए। संगठन वक्ता के रूप में राजेश ठाकुर ने शिवाजी की जीवनी पर प्रकाश डाला।कार्यक्रम की प्रस्तावना संगठन के सचिव उज्जवल पचौरी रखी। कार्यक्रम का संचालन धीरज अग्रवाल एवं आभार अनिल सोनी अन्नू ने व्यक्त किया।कार्यक्रम में शरद चंद्र पालन, अभिजात कृष्ण त्रिपाठी, ओमप्रकाश पटेल, रत्ना श्रीवास्तव, यूएस दुबे, अभिमन्यु जैन, मथुरा चोबे शशि खरे, आलोक पाठक, विध्वेश भापकर, योगेंद्र राजपूत, शंकर चौदहा, देवेंद्र एनपी झरिया, नारायण प्रसाद जी देवकुमार सोनकर, रवि दुबे, चंद्रशेखर शर्मा, डॉ तनखीवाला, शैलेंद्र सिंह, अशोक बिलथरिया, हरीश नामदेव, बसंत उपाध्याय आदि बड़ी संख्या में जन उपस्थित थे।
सम्मान :- कार्यक्रम के दूसरे चरण में प्रतिभा भापकर, प्रवीण मजूमदार, तरुण सोनने, शिवाजी राव मांडले, विजय कुमार जाधव, पांडुरंग गायकवाड़, श्रीकांत काले, किशोर कमलकर, अनिल राव गायकवाड़, दिनेश राव जाधव, आकाश राव धनेधर, विद्वेष भापकर, मनोज मारवते, पुरषोत्तम भालेकर, प्रमोद फाटक का सम्मान किया गया। आचार्य विद्यासागर जी को दी श्रद्धांजलि :- कार्यक्रम के दौरान समरसता सेवा संगठन के सदस्यों एवं आमंत्रित जनों द्वारा परम पूज्य आचार्य विद्यासागर जी महाराज के समाधिस्थ होने पर भावपूर्ण श्रद्धांजलि दी गई। इस अवसर पर सभी ने दो मिनिट का मौन रखकर श्रद्धांजलि दी।



