सांस्कृतिक प्रतियोगिताओं का शुभारंभ

जबलपुर दर्पण। सांस्कृतिक गतिविधियों का शुभारंभ प्राचार्य डॉ. तरूण बाजपेई सर की अध्यक्षता, डॉ रंगनाथ शुक्ला सर के मुख्य आतिथ्य एवं वाणिज्य संकाय विभागाध्यक्ष डॉ एच. एन . मिश्रा सर के संरक्षण ब कला संकाय विभागाध्यक्ष/ सांस्कृतिक प्रभारी प्रो. शिखा ताम्रकार के निर्देशन में दीप्पजलित कर मां सरस्वती व श्री गणेश पूजन एवं स्तुति से हुआ। अतिथि महोदय ने अपने उद्बोधन में छात्र छात्राओं को बताया की भारतीय संस्कृति के विभिन्न खाद्य आदतों, परंपराओं, विश्वासों, सामाजिक रीति-रिवाजों, पोशाक, भाषा, त्योहारों आदि के लिए सांस्कृतिक रूप से समृद्ध देश माना जाता है, विविध धर्म, कला, वास्तु कला, साहित्य, संगीत, नृत्य की विभिन्न शैलियां भारत में विविधता में एकता के अखंडित स्वरूप वाले सबसे बड़े प्रजातंत्र का प्रतिनिधित्व करती है।भारतीय संस्कृति को श्रेष्ठ इसलिए कहा गया है, क्योंकि इसमें आध्यात्मिकता के साथ वैज्ञानिक दृष्टिकोण भी समाया हुआ है। बही प्राचार्य जी ने बताया की संस्कृति शिक्षा या जन्म देने वाली अवस्था है। यह विशिष्ट समय पर एक विशिष्ट समाज के विचार और दर्शन है। वास्तव में संस्कृति को नैतिकता और नैतिक मूल्यों से बनाया जाता है जो एक समाज को नियंत्रित करती है, संस्कृति सामाजिक धार्मिक मान्यताओं, रीति-रिवाजों, परंपराओं आदि जैसे कई कारकों का परिणाम है तो यह महत्वपूर्ण है कि हम अपनी संस्कृति को समृद्ध और सकारात्मक विचारों के साथ विकसित करें।आपके प्रेरणा दायक उद्बोधन से प्रेरित हो कर छात्र छात्राओं में उत्साह देखने को मिला । कार्यक्रम का सफल संचालन श्री अनुराग नामदेव द्वारा किया गया व आभार प्रदर्शन कु.राधा मौर्य द्वारा किया गया ।तत्पश्चात प्रथम दिवसानुसार रंगोली एवं मेंहदी प्रतियोगिता आयोजित हुई ।प्रतियोगिताओं में निर्णायक की भूमिका श्रीमती दिव्या पाठक कुमारी ओशीन नामदेव एवं श्रीमती रश्मि नामदेव ने निभाई । कार्यक्रम में महाविद्यालय परिवार के समस्त प्राध्यापक एवं कर्मचारी उपस्थिति रहे ।



