जबलपुर दर्पणमध्य प्रदेश

दो दिवसीय गुरु तेग बहादुर खालसा महाविद्यालय में राष्ट्रीय विज्ञान दिवस का आयोजन

जबलपुर दर्पण। श्री गुरु तेग बहादुर खालसा महाविद्यालय में 28 फ़रबरी से 29 फ़रबरी 2024 तक राष्ट्रीय विज्ञान दिवस 2024 का आयोजन “नेशनल काउंसिल फॉर साइंस एंड टेक्नोलॉजी कम्युनिकेशन DST नई दिल्ली ,म.प्र. विज्ञान और प्रौद्योगिकी परिषद भोपाल के सौजन्य से किया गया इस वर्ष विज्ञान दिवस की थीम “Indigenous Technologies for Developed India ” रही। कार्यक्रम के उद्घाटन समारोह में मुख्य अतिथि डॉ. रवि कटारे, विभागाध्यक्ष, शासकीय विज्ञान महाविद्यालय,जबलपुर,जूरी मेंबर डॉ. आर.के.पाठक, डायरेक्टर, इंफिनिटी इंस्टिट्यूट ऑफ़ मैनेजमेंट,सागर एवं महाविद्यालय प्राचार्य डॉ. आर. एस. चंडोक की गरिमामय उपस्थिति रही, कार्यक्रम का शुभारम्भ प्राचार्य महोदय एवं उपस्थित सभी सम्मानीय विशिष्टजनो द्वारा माँ सरस्वती व गुरु महाराज के समक्ष दीपप्रजव्वलन से हुआ, सरस्वती वंदना
सर्वप्रथम अपने स्वागतीय उद्वोधन में प्राचार्य महोदय जी ने उपस्थित सभी सम्मानीयजनो व प्रतिभागियों का स्वागत करते हुए कहा की विज्ञान के विकास व बढ़ते उपयोग मे मानव जीवन की कई गतिविधियों को बेहद आसान बना दिया है। विज्ञान भावी पीढ़ी के लिए केवल साधन मात्र ही नहीं बल्कि जरूरत बनता जा रहा है, राष्ट्रीय विज्ञान दिवस हर साल 28 फरवरी को ‘रमन प्रभाव’ की खोज के उपलक्ष्य में मनाया जाता है, इसका प्रमुख उद्देश्य विज्ञान के बढ़ते प्रभाव को और समृद्ध करना है, भारत के 2024 में प्रवेश करने के साथ ही यह विषय भारत की उभरती वैश्विक भूमिका और अंतरराष्ट्रीय क्षेत्र में उसकी बढ़ती दृश्यता को इंगित करता है।बीते दिनों में कोरोना का जहां दुष्परिणाम देखने में आया वहीँ इस आपदा ने विज्ञान के क्षेत्र में नए अवसर प्रदान किये, मुख्य अतिथि प्रो.रवि कटारे जी के द्वारा अपने व्यख्यान में विज्ञान दिवस के उद्देश्य और सर सीवी रमन के व्यक्तित्व और रिसर्च पर विस्तृत चर्चा करते हुए विद्यार्थियों को प्रोत्साहित किया आपने कहा की आज विद्यार्थियों का विज्ञान के प्रति रुझान कम होता जा रहा है और यदि रमनजी के व्यक्तित्व से कुछ विद्यार्थी प्रेरित हो जाते हैं तो यह हमारे लिए गर्व का विषय होगा यह सुनिश्चित करना बहुत ही कठिन है कि, वैश्विकरण या ग्लोबलाइजेशन मानवता के लिए लाभप्रद है या हानिकारक कार्यक्रम में आगे जूरी मेंबर डॉ. आर. के. पाठक जी ने विद्यार्थियों को सम्बोधित करते हुए कहा की विद्यार्थी जीवन में साइंटिफिक टेमरामेन्ट विकसित करना चाहिए, विज्ञान के क्षेत्र ने पूरे विश्वभर में लोगों को कार्य करने के महान अवसर दिए है विद्यार्थी जीवन में रहते हुए उन अवसरों को खोज कर उन पर कार्य किये जाने की आवश्यकता है, इसने समाज में लोगों की जीवन-शैली और स्तर में बड़े स्तर पर बदलाव किया जा सके यह विकासशील देशों या राष्ट्रों के लिए विकसित होने के बहुत से अवसरों को प्रदान करता है, जो ऐसे देशों के लिए बहुत आवश्यक है, विज्ञान दिवस में विद्यार्थियों की रूचि और सहभागिता बढ़ाने के उद्देश्य से निबंध प्रतियोगिता, पोस्टर प्रतियोगिता, साइंटिफिक रंगोली एवं क्विज प्रतियोगिता का आयोजन किया गया ।जिसमे विद्यार्थियों ने बढ़चढ़ कर भाग लिया, प्रतियोगिता में विद्याथियों की प्रतिभा को प्रोत्साहित करने के लिए निर्णायक की भूमिका में डॉ. आर. के. पाठक ,डॉ. शशि दुबे एवं संजय गुप्ता में रहे, कार्यक्रम में डाॅ. मनीष शाह, डाॅ. एस.एम मिश्रा, डाॅ अन्जू पाठक, डाॅ. विपिन राय, श्रीमती प्रकृति बिस्वास, डॉ. शशि दुबे, डॉ संध्या कोष्टा जी एस. वालिया,डॉ. रोहित वर्मा, रत्नेश नामदेव एवं सभी प्राध्यापक और विद्यार्थी सम्मिलित हुए ।
कार्यक्रम की समन्वय व आभार प्रदर्शन डॉ. हर्षिता शुक्ला के द्वारा किया गया। कार्यक्रम के आयोजन सचिव डॉ. सौरभ गुप्ता रहे और कार्यक्रम के संचालन श्रीमती श्रद्धा जैन के द्वारा किया गया।

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