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हिरन की हालत क्या हो गई भगवान, कि तेरे जल को तरस रहा इंसान

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जबलपुर दर्पण। सिहोरा तहसील के 50 गांव के जनता,पशु, पक्षी, जानवरों को पानी से तरोताजा करने वाली मां हिरन नदी आज सूखी पड़ी है। मानव जीवन, पशु-पक्षी जंगली जानवर, मछलियां, पेड़ पौधे, इन सब का जीवन खतरे में पड़ गया है। और जिला प्रशासन बैठे बैठे ग्रामीणों की तबाही का तमाशा देख रहा है। बताया जा रहा है कि हिरन नदी की धार करीब एक माह पूर्व से सूखी पड़ी है। हालांकि बरगी डेम निकली दाएं तट नहर से पिछले सप्ताह करीब 4 से 5 दिनों के लिए पानी हिरन नदी में छोड़ा गया था। फिर पुनः पिछले 15 दिन पूर्व नहर से हिरन नदी में पानी देना बंद किया जा चुका है। पानी बंद के उपरांत हिरन नदी सुख कर टीलों मै परिवर्तित हो गई है। और हेण्डपंपों का जलस्तर नीचे होने पर सूखे व बंद पड़े हैं। कुआं, बावली, तालाब, छोटे नदी-नाले सूखे पड़े हैं। आश्चर्य की बात तो यह है कि हिरन नदी को जीवित रखने वाला बदुआ डेम आज भी आधा अधूरा बना पड़ा है।जो जल संरक्षण विभाग व परियोजना के बड़े अधिकारी हाथ पर हाथ धरे बैठकर हिरन नदी की तबाही का सबक बन बैठे हैं। हिरन नदी सूखने के जिम्मेदार भी वही है। हिरन नदी के किनारे सभी धार्मिक स्थान देवालों, मंदिरों के जलाभिषेक, पूजा, पाठ प्रभावित हो गए हैं। जबकि लोग स्नान करना, पशुओं को पानी पिलाना, जंगली जानवरों को पानी के लिए भटकना, वही नदी किनारे गरीब मजदूरों को साग-सब्जी, खीरा, ककड़ी, चीमणी, शकरकंद, जैसे कई फल फूल फसले सूखने की कगार पर हो गई हैं। शासन प्रशासन व नहर विभाग के बड़े अधिकारियों से हिरन नदी के किनारे बसे गांव के हजारों लोगों ने मांग किया है कि प्रतिवर्ष की तरह इस वर्ष भी दाएं तट नहर का पानी सचुली गेट नंबर 83 से हिरन नदी में पानी छोड़ा जाए। ताकि जनता, पशु, पक्षी, जानवरों को पानी की परेशानी से बचाया जा सके।

नर्मदा विकास संभाग क्रमांक 4 सिहोरा सब इंजीनियर भूपेंद्र सिंह ने बताया कि कुछ सुधार कार्य चल रहा था। जिसके कारण नहर का पानी रोका गया था। बड़े अधिकारियों को सुचित कर 15 मई तक हिरन नदी में पानी छोड़ा जा सकता है।

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