सामाजिक सहिष्णुता और समरसता के नाम होगा आयोजन

जबलपुर दर्पण। समरसता शब्द को समाज में साकार करने के पावन और दिव्य उद्देश्य से गठित ‘समरसता सेवा संगठन’ का दूसरा संस्कारधानी कजलियां महोत्सव का आयोजन इस बार भी आगामी 20 अगस्त को अपरान्ह 3 बजे से मदन महल स्थित दद्दा परिसर में आयोजित होने जा रहा है। इस महोत्सव की तैयारियां शुरू हो गई हैं।
इस बार पिछले वर्ष की तुलना में और अधिक सामाजिक संगठनों की आयोजन में सहभागिता होगी। कजलियों को बोन हेतु पात्रों का वितरण 9 अगस्त शुक्रवार को सिंधी धर्मशाला में आयोजित चौरसिया दिवस के कार्यक्रम में होगा। इसके साथ ही आयोजन की तैयारियां प्रारंभ हो जाएंगी।
इस आशय की जानकारी संगठन के अध्यक्ष संदीप जैन, सचिव उज्जवल पचौरी , महाकौशल चेंबर ऑफ कामर्स एंड इंडस्ट्रीज के अध्यक्ष श्री रवि गुप्ता , वरिष्ठ समाजसेवी श्री शरद चंद्र पालन सहित अन्य पदाधिकारियों ने पत्रकार वार्ता में दी।
40 से अधिक आयोजन – विगत एक वर्ष की आयोजन यात्रा के बारे में अध्यक्ष संदीप जैन ने बताया कि समरसता सेवा संगठन ने बीते एक वर्ष में चालीस से अधिक आयोजन किए हैं। इनमें सभी महापुरुषों की जयंती पर उनके विचारों के प्रसार के लिए संगोष्ठी, विचारमाला का आयोजन किया है। इनमें सभी समाजों के हजारों प्रबुद्धजनों और विभूतियों को सम्मानित किया गया है।
इसके साथ ही सब सबको जाने, सब सबको मानें के ध्येय वाक्स को आत्मसात करते हुए समरसता के सार्वजनिक आयोजन भी किए गए हैं। इनमें कजलियों महा महोत्सव और समरसता होली मिलन के आयोजन हर स्तर पर चर्चाओं में रहे हैं।
सभी का मिला आशीर्वाद – श्री जैन ने बताया कि समरसता के पवित्र विचार के प्रसार में संत-महात्माओं सहित प्रत्येक समाज के विचारवान लोगों का आशीर्वाद समससता सेवा संगठन को मिला है। संगठन का श्रीगणेश तुलसी पीठाधीश्वर स्वामी श्री रामभद्राचार्य जी के आशीर्वाद और आशीवर्चन के साथ हुआ था। तब से अब तक अनेक संत-महात्माओं का सानिध्य संगठनक को मिल चुका है।
संगठन की विचार यात्रा को आगे बढ़ाते हुए इस बार प्रकृति सेवा को भी सेवा प्रकल्प में शामिल किया गया है। जिसके तहत हाल ही में मां नर्मदा के घुघरा तट पर लगभग 1300 फलदार-छायादार वृक्षों का रोपण सर्व समाज के प्रबुद्धजनों की उपस्थिति में किया गया।
समाज में हो एकता का संचार – श्री जैन ने बताया कि भारतीय त्यौहार सामाजिक सहिष्णुता और समरसता के प्रतीक हैं। इन पर्वो के आयोजन पर सभी जाति, वर्ग और समाज के लोग आपस में जुड़कर आपसी एकता का संचार करते हैं।
कजलियां महापर्व भी इसी परंपरा से ओतप्रोत है, जिसमें समन्वय, सद्भाव व समरसता की सामाजिक खुशबू है। ये खुशबू हमारे मन-बुद्धि में फैलकर वृहद रूप से राष्ट्रीय एकता की माला बन कर भारत माता के गले का मंगलाहार बनती है।
इसी उद्देश्य के साथ समरसता संगठन ने कजलियां महोत्सव के आयोजन की संयोजना की है। इस भव्य-दिव्य एवं गरिमामय समारोह की संयोजना पर संतों-महंतों सहित प्रबुद्धजनों का आशीर्वाद और सबका साथ एक मंच पर होगा।
अनेक संगठनों की सहभागिता- श्री जैन ने बताया कि संस्कारधानी के इतिहास में समरसता सेवा संगठन ने विगत वर्ष पहली बार बड़े स्तर पर कजलियां महोत्सव मनाया था। पिछले वर्ष संस्कारधानी के 42 सामाजिक संगठनों की सहभागिता थी। इस बार आयोजन को लेकर सर्वसमाज के उत्साह को देखते हुए श्री जैन ने आशा जताई कि पिछली बार से अधिक संगठनों की सहभागिता आयोजन में होगी। इसके अलावा कई व्यापारिक, सांस्कृतिक, शैक्षणिक संस्थाओं की सहभागिता भी रहेगी।
आयोजन में शामिल संगठनों के प्रतिनिधि चौरसिया दिवस (नागपंचमी) आयोजन में वितरित किए गए कजलियां पात्र में बोई हुई कजली लेकर उपस्थित होंगे। जिनकी पूजन के उपरांत सभी पारंपरिक रूप सेएक दूसरे को कजलियोंं का आदान-प्रदान कर शुभकामनाएं प्रेषित करेंगे।
कजलियां भोज का अनूठा जायका – कजलियां महा महोत्सव में पिछली बार की तरह इस बार भी सामाजिक संगठनों द्वारा पारंपरिक स्वादिष्ट और जायकेदार खान-पान की व्यवस्था की भी धूम रहेगी। वहीं नृत्य नाटिका, कजरी, आल्हा, लोकगीत गायन सहित पारंपरिक नृत्य की मन मोहनी प्रस्तुति दी जाएगी।
महिलाओं एवम बच्चो के लिए प्रतियोगिता – आयोजन में बच्चों और महिलाओं के लिए प्रतियोगिता का आयोजन भी किया जाएगा। जिसके अंतर्गत माध्यमिक एवं उच्चतर माध्यमिक तथा महाविद्यालय छात्रों के लिए “सामाजिक समरसता में कजलियां पर्व की महत्ता ” विषय पर निबंध प्रतियोगिता एवं महिलाओं के लिए राखी बनाओ प्रतियोगिता के साथ ही पारंपरिक सामाजिक परिधानों के साथ श्रेष्ठ वेशभूषा प्रतियोगिता भी आयोजित की जाएंगी ।
वहीं चाइल्ड जोन में बच्चों के आनंद के लिए भी इंतजाम किए जाएंगे।



