बासमती धान उत्पादक किसानों की चिंता करे सरकार- भारतीय किसान संघ

जबलपुर दर्पण । मध्यप्रदेश में बासमती धान उत्पादक किसानों की संख्या में तेजी से वृद्धि हो रही है, लेकिन इस वर्ष किसानों को उनके उत्पाद का उचित मूल्य नहीं मिल रहा है। पिछले राज्य सरकार के कार्यकाल में बासमती चावल के बंपर निर्यात से किसानों को अच्छे बाजार भाव मिले थे, लेकिन इस वर्ष बासमती धान के बंपर उत्पादन के बावजूद बाजार में कीमतें गिर गई हैं, जिससे किसानों को अपनी लागत भी नहीं मिल पा रही है। भारतीय किसान संघ ने मध्यप्रदेश की मोहन यादव सरकार से मांग की है कि बासमती धान उत्पादक किसानों की चिंता करते हुए उन्हें उनकी उपज का लाभकारी मूल्य सुनिश्चित करने के लिए उचित कदम उठाए जाएं। औने-पौने दामों पर बिक रही बासमती धान पाटन के बासमती धान उत्पादक किसान सुनील पटेल ने बताया कि कृषि विभाग और सरकार के प्रोत्साहन से इस वर्ष जबलपुर जिले में बासमती धान का बंपर उत्पादन हुआ है। हालांकि, बासमती धान के दाम न मिलने के कारण किसान परेशान हैं। बासमती धान उगाने में किसानों को अधिक लागत और श्रम लगता है, और प्रति एकड़ केवल 12 क्विंटल उत्पादन होता है, जबकि मोटी धान का उत्पादन प्रति एकड़ 22 से 25 क्विंटल तक होता है। ऐसे में, बासमती उत्पादक किसान बाजार के भाव से ठगा महसूस कर रहे हैं, और सरकार या प्रशासन की ओर से कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है। जीआई टैग न मिलने से बासमती धान के दाम नहीं भारतीय किसान संघ के अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख राघवेन्द्र सिंह पटेल ने कहा कि मध्यप्रदेश में बासमती चावल को जीआई (जियोलॉजिकल इंडिकेशन) टैग नहीं मिलने के कारण यहां के बासमती धान उत्पादक किसानों को अच्छे दाम नहीं मिल पा रहे हैं। वर्तमान में मध्यप्रदेश में बासमती धान का औसत विक्रय मूल्य 2960 रुपये प्रति क्विंटल है, जबकि पिछले वर्ष यही धान 4550 रुपये प्रति क्विंटल बिक रही थी। यह स्थिति किसानों के लिए चिंताजनक है, क्योंकि जिन राज्यों में बासमती को जीआई टैग मिला हुआ है, वहां के किसानों को बेहतर दाम मिल रहे हैं। बासमती धान की मध्यप्रदेश से निर्यात की स्थिति वर्ष 2015 से 2023 तक के आंकड़ों के अनुसार, मध्यप्रदेश से 12,706 करोड़ रुपये का चावल निर्यात हुआ है। 2023 में अकेले 3,634 करोड़ रुपये का चावल निर्यात हुआ, जिससे किसानों को अच्छे दाम मिलने की उम्मीद थी। लेकिन इस वर्ष बासमती धान के गिरते दामों से किसान चिंतित हैं। भारतीय किसान संघ ने राज्य सरकार से यह अनुरोध किया है कि वह बासमती धान उत्पादक किसानों की समस्याओं का समाधान करें और उन्हें उनकी उपज का उचित मूल्य दिलवाने के लिए कदम उठाए।



