रोपवे को मंदिर प्रबंधन समिति दिखाए बाहर का रास्ता

मैहर। मां शारदादेवी के दर्शन दर्शनार्थियों को सुगम से हों इस उद्देश्य से मैहर की पहाड़ी में लगाया गया रोपवे भ्रष्टाचार की कमाई का जरिया ज्यादा बनकर सामने आया है। इससे सबसे अधिक नुकसान मां शारदादेवी मंदिर प्रबंध समिति को हुआ है। श्रद्धालुओं के लिए दर्शन को सरल बनाने के इरादे से करीब 17 साल पहले लगाया गया मोनो केबल रोपवे बेईमानी की बुनियाद पर है। कलकत्ता की दामोदर रोपवे एंड कंस्ट्रक्शन कंपनी प्राइवेट लिमिटेड और शारदा प्रबंध समिति मैहर के बीच अनुबंध के तहत बाई केबल रोपवे लगाया जाना था। किंतु उसने तत्कालीन अधिकारियों की मिली भगत से मोनो केबल रोपवे में परिवर्तित कर दिया। इस तरह रुपए को सीधे लाभपहुंचाया गया। जबकि बाई केबल रोपवे लगने से एक केबिन में 6 लोगों को बैठने की व्यवस्था का लाभ मिलता। इतना ही नहीं मां शारदा प्रबंध समिति की किराएदार दामोदर रोपवे शासन द्वारा नियुक्त समिति पदाधिकारियों की उपेक्षा, उनको अपमानित करना, और उनके साथ दुर्व्यवहार करना यह सब रोपवे प्रबंधन के लिए आम बात हो गई है। दामोदर रोपवे द्वारा की जा रही मनमानी और वित्तीय अनियमिताओं की जांच कराने हेतु समिति सदस्य तारकेश्वर तिवारी द्वारा हाईकोर्ट जबलपुर में याचिका दायर की गई थी जहां की उच्च न्यायालय जबलपुर द्वारा रीवा कमिश्नर को रोपवे की जांच करने हेतु निर्देशित किया गया। रीवा कमिश्नर ने जांच टीम गठित कर रोपवे की जांच कराई गई जहां की व्यापक गड़बड़ियां सामने आई है। रीवा कमिश्नर द्वारा दिनांक 31 जनवरी 2025 को किए गए आदेश में लेख किया है कि सितंबर 2009 से अगस्त 2015 तक की वास्तविक आय एवं सितंबर 2009 से अगस्त 2021 तक वास्तविक अनुमत्य व्यय की जानकारी रोपवे प्रबंधन द्वारा जांच दल को उपलब्ध नहीं कराई गई जिससे उद्यमी का वास्तविक लागत पे आउट पीरियड का निर्धारण संभव नहीं हुआ। रीवा कमिश्नर ने आदेश में यह भी कहा है कि कैशफ्लो के माध्यम से यह बताया गया है कि माह जुलाई 2023 की स्थिति में रोपवे प्रबंधन की निवेशित राशि की वसूली 1697 लाख बकाया है। रुपए 7.50 करोड़ की निर्माण लागत के विरुद्ध लगभग 80 करोड़ आय होने जिसमें से मंदिर समिति को मात्र 19.61 करोड़ रॉयल्टी प्रदान की गई। शेष राशि रुपए 60 करोड़ स्वयं रखने के बावजूद भी लागत वसूली हेतु 17 करोड़ बकाया दर्शाया जाना वास्तविकता से अत्यंत परे है। इस तरह दामोदर रोपवे द्वारा मंदिर समिति को गुमराह कर आर्थिक क्षति पहुंचाने का कार्य किया जा रहा है। मंदिर प्रबंधन समिति को अब जनहित को सर्वोपरि मानते हुए तथा समिति की आय को बढ़ाने के लिए उसे यह सोचना होगा कि दामोदर रोपवे कलकत्ता की कंपनी को हटाकर नए टेंडर कराए और किसी अन्य साफसुथरी छवि वाली कंपनी को यह दायित्व सौंपे। क्योंकि दामोदर रोपवे कम्पनी मैहर में काफी बदनाम हो चुकी है।



