वन्यजीवों के प्रति वन विभाग की लापरवाही

पुलिस ने दिखाई मानवता और दरियादिली
ढीमरखेड़ा, रामपुर बीट क्षेत्र में एक दिल दहला देने वाला दृश्य सामने आया, जब एक अज्ञात वाहन की टक्कर से घायल हुआ लंगूर घंटों तक सड़क किनारे मौत से जूझता रहा। यह हादसा ढाबा कैंप और रामपुर बीट के बीच हुआ, जहां लंगूर सुबह 10:30 बजे से दोपहर 1:30 बजे तक तड़पता रहा। सबसे दुखद बात यह थी कि रामपुर बीट प्रभारी की नजर इस घायल लंगूर पर नहीं पड़ी, और न ही उन्होंने कोई मदद करने की पहल की। वन विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों की इस उदासीनता ने एक बार फिर साबित कर दिया कि वन्यजीवों की सुरक्षा उनके लिए प्राथमिकता नहीं रह गई है।
घायल लंगूर की बेबसी और जिम्मेदारों की बेरुखी
घायल लंगूर सड़क पर कराहता रहा, लेकिन रामपुर बीट प्रभारी समेत वन विभाग के अन्य कर्मचारियों ने इस ओर कोई ध्यान नहीं दिया। वन विभाग की इस लापरवाही को देखकर यह स्पष्ट हो गया कि बेजुबान जानवरों की रक्षा के लिए बनाए गए सरकारी तंत्र की संवेदनशीलता खत्म हो चुकी है। आम जनता अक्सर यह मानती है कि वन विभाग के अधिकारी और कर्मचारी वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए तत्पर रहते हैं, लेकिन इस घटना ने उनकी कार्यशैली पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया। अगर पुलिस विभाग और खम्हरिया बीट के प्रदीप तिवारी समय पर न पहुंचे होते, तो शायद इस लंगूर की जान चली जाती।
पुलिस बनी बेजुबानों की मसीहा*
घटना स्थल से गुजर रही डायल 100 पुलिस की नजर घायल लंगूर पर पड़ी। पुलिसकर्मियों ने तुरंत वाहन को रोका और प्राथमिक उपचार के लिए जरूरी कदम उठाए। आमतौर पर पुलिस को अपराध नियंत्रण और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए जाना जाता है, लेकिन इस घटना में उन्होंने मानवता और सेवा भाव का परिचय दिया।पुलिसकर्मियों की सक्रियता को देखते हुए, खम्हरिया बीट में पदस्थ प्रदीप तिवारी भी मौके पर पहुंचे। उन्होंने बिना देर किए अपने कर्तव्यों का पालन करते हुए वन विभाग को सूचना दी। लेकिन वन विभाग की सुस्ती यहां भी देखने को मिली। रामपुर डिप्टी रेंजर को घटना की सूचना दी गई, लेकिन उन्हें मौके पर पहुंचने में आधे घंटे से ज्यादा का समय लग गया। यह सुस्ती और लापरवाही किसी भी तरह से स्वीकार्य नहीं है। यह सोचने वाली बात है कि जब वन विभाग के अधिकारी बेजुबान जानवरों की रक्षा के प्रति इतने लापरवाह हैं, तो वन्यजीव संरक्षण की स्थिति कैसी होगी?
वन विभाग की कुंभकर्णी नींद
यह कोई पहला मामला नहीं है जब वन विभाग की लापरवाही के कारण किसी वन्यजीव को नुकसान उठाना पड़ा हो। रामपुर बीट समेत कई अन्य वन क्षेत्रों में अक्सर ऐसी घटनाएं सामने आती हैं, जहां वन्यजीव सड़क दुर्घटनाओं का शिकार हो जाते हैं, लेकिन विभाग कोई ठोस कदम नहीं उठाता। वन विभाग के कर्मचारियों को ऐसे मामलों में तत्काल कार्रवाई करनी चाहिए थी। अगर वे सतर्क रहते, तो लंगूर को इतनी देर तक तड़पना नहीं पड़ता। वन्यजीवों के इलाज के लिए वन विभाग को उचित संसाधन और आपातकालीन सेवाएं तैयार रखनी चाहिए। यह बेहद शर्मनाक है कि वन्यजीवों की रक्षा का जिम्मा जिनके कंधों पर है, वे ही अपने कर्तव्य से विमुख हो रहे हैं। अगर इस तरह की लापरवाही जारी रही, तो आने वाले समय में वन्यजीव संरक्षण केवल कागजों तक सीमित रह जाएगा।
*डॉक्टरों की तत्परता से बची लंगूर की जान।
इस घटना में राहत की बात यह रही कि डॉक्टरों की टीम ने बिना समय गंवाए घायल लंगूर का इलाज शुरू किया। डॉक्टर रवि सोनी और डॉक्टर सुयश मिश्रा ने तत्परता दिखाते हुए प्राथमिक उपचार किया। स्वचलित वाहन में मौजूद डॉक्टरों ने तुरंत मेडिकल सहायता प्रदान की, जिससे लंगूर की जान बचाई जा सकी। अगर डॉक्टर मौके पर नहीं पहुंचते, तो शायद यह लंगूर भी उन अनगिनत वन्यजीवों की सूची में शामिल हो जाता, जो वन विभाग की लापरवाही की वजह से दम तोड़ देते हैं।
पुलिसकर्मियों की सराहनीय भूमिका
इस पूरे घटनाक्रम में पुलिस विभाग के तीन कर्मचारी करण सिंह, दीपक श्रीवास और सुबच्चन यादव ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने न केवल घायल लंगूर को देखा, बल्कि उसके उपचार के लिए आवश्यक कदम भी उठाए। उनका यह मानवीय कार्य क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है, और आम जनता उनकी संवेदनशीलता की तारीफ कर रही है। अब सबसे बड़ा सवाल यह उठता है कि क्या वन विभाग अपनी जिम्मेदारी को गंभीरता से लेगा? क्या वन विभाग अब जागेगा और वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए आवश्यक कदम उठाएगा?



