मध्य प्रदेशसीधी दर्पण

सेमरिया सीएम राइज स्कूल में शासकीय किताबों की कालाबाज़ारी पर बवाल,अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद व समाजसेवियों ने उठाई निष्पक्ष जांच की मांग

सीधी जबलपुर दर्पण । जिले के सेमरिया स्थित सीएम राइज विद्यालय में छात्रों के लिए प्रदाय शासकीय पुस्तकें बाजार में बेचे जाने के गंभीर आरोपों ने शिक्षा व्यवस्था की पारदर्शिता पर प्रश्नचिन्ह खड़ा कर दिया है। मामले के सार्वजनिक होते ही छात्र संगठन अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद और समाजसेवी संगठनों ने इसे गंभीर बताते हुए प्रशासन से सख्त कार्रवाई की मांग की है। सोमवार की शाम अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद की टीम जिला मुख्यालय स्थित कलेक्ट्रेट परिसर पहुंची, जहां जिला शिक्षा अधिकारी पवन सिंह को ज्ञापन सौंपा गया। प्रतिनिधिमंडल में अंजना सिंह, दिव्य प्रकाश, स्नेहा, सौरव, विद्याकांत सहित कई छात्र कार्यकर्ता शामिल रहे।
उन्होंने कहा कि विद्यालय में छात्रों के शैक्षणिक अधिकारों का हनन हुआ है और दोषियों को संरक्षण देने वालों को भी बेनकाब किया जाना चाहिए। इसी क्रम में समाजसेवी प्रभात वर्मा के नेतृत्व में बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने सेमरिया तहसील कार्यालय पहुंचकर तहसीलदार को कलेक्टर सीधी स्वरचित सोमवंशी के नाम ज्ञापन सौंपा। ग्रामीणों का आरोप है कि मामले में कुछ स्थानीय प्रभावशाली लोग, जिनमें पटवारी भी शामिल हैं, आरोपी शिक्षकों और विद्यालय प्राचार्य को बचाने का प्रयास कर रहे हैं। ज्ञापन में निष्पक्ष जांच कमेटी गठित कर पूरे मामले की गहराई से जांच की मांग की गई है। रविवार को भी गांव में इस मुद्दे को लेकर लोगों का आक्रोश देखने को मिला था। ग्रामीणों का कहना है कि सरकारी किताबों को बाजार में बेचकर शिक्षा का व्यवसायीकरण किया गया, जो अत्यंत निंदनीय है। प्रकरण की गंभीरता को देखते हुए जिला शिक्षा अधिकारी पवन सिंह ने तीन सदस्यीय जांच समिति गठित करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा है कि मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा।

इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि शासकीय संस्थानों में पारदर्शिता और जवाबदेही कितनी आवश्यक है। अब जिले की जनता की निगाहें इस पर टिकी हैं कि प्रशासन किस स्तर तक जाकर सच्चाई सामने लाता है और दोषियों के विरुद्ध क्या ठोस कदम उठाता है।जिले के सेमरिया स्थित सीएम राइज विद्यालय में छात्रों के लिए प्रदाय शासकीय पुस्तकें बाजार में बेचे जाने के गंभीर आरोपों ने शिक्षा व्यवस्था की पारदर्शिता पर प्रश्नचिन्ह खड़ा कर दिया है। मामले के सार्वजनिक होते ही छात्र संगठन अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद और समाजसेवी संगठनों ने इसे गंभीर बताते हुए प्रशासन से सख्त कार्रवाई की मांग की है। सोमवार की शाम अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद की टीम जिला मुख्यालय स्थित कलेक्ट्रेट परिसर पहुंची, जहां जिला शिक्षा अधिकारी पवन सिंह को ज्ञापन सौंपा गया। प्रतिनिधिमंडल में अंजना सिंह, दिव्य प्रकाश, स्नेहा, सौरव, विद्याकांत सहित कई छात्र कार्यकर्ता शामिल रहे।
उन्होंने कहा कि विद्यालय में छात्रों के शैक्षणिक अधिकारों का हनन हुआ है और दोषियों को संरक्षण देने वालों को भी बेनकाब किया जाना चाहिए। इसी क्रम में समाजसेवी प्रभात वर्मा के नेतृत्व में बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने सेमरिया तहसील कार्यालय पहुंचकर तहसीलदार को कलेक्टर सीधी स्वरचित सोमवंशी के नाम ज्ञापन सौंपा। ग्रामीणों का आरोप है कि मामले में कुछ स्थानीय प्रभावशाली लोग, जिनमें पटवारी भी शामिल हैं, आरोपी शिक्षकों और विद्यालय प्राचार्य को बचाने का प्रयास कर रहे हैं। ज्ञापन में निष्पक्ष जांच कमेटी गठित कर पूरे मामले की गहराई से जांच की मांग की गई है। रविवार को भी गांव में इस मुद्दे को लेकर लोगों का आक्रोश देखने को मिला था। ग्रामीणों का कहना है कि सरकारी किताबों को बाजार में बेचकर शिक्षा का व्यवसायीकरण किया गया, जो अत्यंत निंदनीय है। प्रकरण की गंभीरता को देखते हुए जिला शिक्षा अधिकारी पवन सिंह ने तीन सदस्यीय जांच समिति गठित करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा है कि मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा।

इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि शासकीय संस्थानों में पारदर्शिता और जवाबदेही कितनी आवश्यक है। अब जिले की जनता की निगाहें इस पर टिकी हैं कि प्रशासन किस स्तर तक जाकर सच्चाई सामने लाता है और दोषियों के विरुद्ध क्या ठोस कदम उठाता है।

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