लखनादौन सिविल अस्पताल में लापरवाही का खुलासा

सिवनीजबलपुर दर्पण । छात्रा शीतल यादव को मिला संशोधित जन्म प्रमाण पत्र केवल एक व्यक्तिगत जीत नहीं, बल्कि लखनादौन सिविल अस्पताल के जन्म-मृत्यु पंजीयन विभाग में व्याप्त लापरवाही और कदाचार का एक ज्वलंत उदाहरण भी है। शीतल के मामले में न्याय मिलने के बाद अब अस्पताल की ऑपरेटर नम्रता भलावी पर गंभीर आरोप लग रहे हैं, जो आम जनता को भी परेशान करने में संकोच नहीं करती हैं।
सामाजिक कार्यकर्ता हीरालाल डेहरिया ने बताया कि ऑपरेटर नम्रता भलावी ने शीतल को काफी दिनों तक परेशान किया। और बाद में उसे सुधारने के बजाय शीतल को महीनों तक दफ्तरों के चक्कर कटवाए। डेहरिया के अनुसार, नम्रता भलावी का कार्यालय पर आने वाले ग्रामीणों से व्यवहार ठीक नहीं रहता है, और उन पर जन्म प्रमाण पत्र के लिए 50 से 100 रुपये तक की अवैध मांग करने का भी आरोप है।
इस पूरे प्रकरण ने लखनादौन सिविल अस्पताल के कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। शीतल के जन्म प्रमाण पत्र में हुई मामूली गलती ने उसे मानसिक रूप से अत्यधिक परेशान किया। वह लखनादौन और जिला मुख्यालय के कई दफ्तरों के चक्कर लगाती रही, लेकिन नम्रता भलावी जैसे कर्तव्यविमुख कर्मचारियों की अनदेखी के कारण उसे राहत नहीं मिली।
मंगलवार को सिवनी कलेक्टर सुश्री संस्कृति जैन की जनसुनवाई में, शीतल को आखिरकार न्याय मिला। कलेक्टर ने उसकी व्यथा को सुना और तत्काल हस्तक्षेप करते हुए संशोधित प्रमाण पत्र जारी करने के निर्देश दिए। यह कार्रवाई यह दिखाती है कि उच्च अधिकारी जनता की शिकायतों को गंभीरता से लेते हैं, लेकिन यह भी स्पष्ट है कि निचले स्तर पर कुछ कर्मचारी अपनी जिम्मेदारियों को ठीक से नहीं निभा रहे और जनता को अनावश्यक रूप से परेशान कर रहे हैं। इस घटना ने नम्रता भलावी जैसे कर्मचारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग को बल दिया है, ताकि भविष्य में आम जनता को ऐसी परेशानियों का सामना न करना पड़े।



