पति और सास-ससुर पर दहेज प्रताडना का मामला दर्ज
सीधी जबलपुर दर्पण । दहेज में फोर व्हीलर की मांग को लेकर नवविवाहिता को 6 वर्ष से प्रताडि़त करने वाले पति और सास-ससुर के विरुद्ध बहरी थाना पुलिस ने अपराध पंजीबद्ध कर विवेचना में लिया है। बहरी थाना अंतर्गत ग्राम केशवाही निवासी पूनम द्विवेदी उम्र 30 वर्ष ने रिपोर्ट में कहा है कि उसकी शादी वर्ष 2019 में हिंदू रीति-रिवाज के अनुसार विवेक द्विवेदी पिता राजपति द्विवेदी निवासी केशवाही के साथ हुई थी। शादी के बाद से ही पति विवेक द्विवेदी, सास पार्वती द्विवेदी एवं ससुर राजपति द्विवेदी ताना देने लगे कि तुम्हारे माता-पिता ने दहेज कम दिया है। जब उन्हें पीडि़ता द्वारा बताया जाता कि उसके माता-पिता की आर्थिक स्थिति कमजोर है। अपनी हैसियत के अनुसार उनके द्वारा दहेज दिया गया। जिस पर तीनों आरोपी फोर व्हीलर गाड़ी, फ्रिज एवं वासिंग मशीन दहेज में लाने की मांग करते हुए धमकी देते कि तुम्हें घर से निकाल देंगे। इनकी प्रताडऩा की शिकायत पीडि़ता अपने माता-पिता एवं भाई-भाभी से करती थी। कई बार मायके पक्ष के लोग ससुराल आकर समझाने का प्रयास भी करते फिर भी कोई सुधार नहीं हुआ। माता-पिता भी पीडि़ता को समझाते थे कि कुछ दिन में सब ठीक हो जाएगा। लेकिन दहेज प्रताडऩा का सिलसिला लगातार गंभीर होता गया। इनके द्वारा तलाक लेने की धमकी भी शुरू कर दी गई। आखिर परेशान होकर पीडि़ता 4 नवंबर 2024 को अपने मायके ग्राम लौआ, थाना बहरी आ गई। पीडि़ता का कहना है कि आरोपी पति विवेक द्विवेदी द्वारा कई बार कुल्हाड़ी से जान लेने का प्रयास किया गया। काफी शारीरिक प्रताडऩा भी दी जा रही थी। लेकिन लोक-लज्जा के चलते वह 6 वर्ष से सब कुछ सहन कर रही थी। ससुराल पक्ष के लोगों ने घर से निकालते समय पीडि़ता के सभी जेवर भी रखवा लिए और धमकी दिया कि अब यहां दोबारा नहीं आना। जिसके बाद पीडि़ता आरोपियों के विरुद्ध कार्यवाही के लिए करीब दो महीने से बहरी थाना, महिला थाना सीधी, पुलिस अधीक्षक कार्यालय सीधी का चक्कर लगा रही थी। जिसके बाद तीनों आरोपियों के विरुद्ध बहरी थाना में अपराध क्रमांक 0553/2025, धारा 85 बीएनएस एवं 3, 4 दहेज प्रतिषेध अधिनियम के तहत अपराध पंजीबद्ध कर विवेचना में लिया गया।बॉक्स नासूर बन गई है दहेज प्रथा दहेज लेना एवं देना अपराध है इस बात की जानकारी आए दिन जिला प्रशासन एवं विधिक जागरूकता शिविर के माध्यम से दी जाती हैं लेकिन दहेज लोभियों के अंदर यह जागरूकता तनिक भी असर नहीं कर रही हैं। सरकार द्वारा भी दहेज प्रथा को रोकने के उद्देश्य से समय समय पर विभिन्न कार्यक्रम आयोजित कराए जाते हैं, इसके अलावा स्वयं सेवी संस्थाओं द्वारा भी दहेज प्रथा के खिलाफ गांव गांव जाकर लोगों को जागरूक किया जाता हैं। इन सबके बाद भी अगर दहेज प्रताड़ना की बात आती है तो यही कहा जाता हैं कि यह प्रथा नासूर बन गई है, जिसे सहजढंग से दूर नहीं किया जा सकता। ऐसे मामलों में दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की ही जागरूकता की टॉनिक बन सकती हैं।



