रूपराह महाविद्यालय के छात्रों ने सुलझाया एक साल पुरानी हत्या का केस

जबलपुर दर्पण । हरि सिंह रूपराह महाविद्यालय में इन दिनों शिक्षा सप्ताह चर्चा का विषय बना हुआ है। शनिवार 13 सितम्बर से शुरू हुए इस अनोखे “एजुकेशन वीक” ने क़ानून के छात्रों को किताबों से बाहर निकाल कर असली अपराध जांच और मुकदमेबाज़ी का स्वाद चखाया। कार्यक्रम का आयोजन कॉलेज की डायरेक्टर (एजुकेशन) श्रीमती निधि कौर पदम रूपराह के नेतृत्व में किया गया, जो स्वयं एन.एल.यूं. रांची की ग्रेजुएट और यूनिवर्सिटी ऑफ़ लंदन से मास्टर्स हैं। सहायक प्राध्यापक सुश्री अनुश्री पाण्डे एवं सुश्री ऐश्वर्या तिवारी ने भी सिक्षा सप्ताह के आयोजन में एहम भूमिका निभाई । उनका उद्देश्य था छात्रों को न्यायिक व्यवस्था के हर चरण का व्यावहारिक अनुभव कराना।
पहले दिन, वरिष्ठ अधिवक्ता श्री नरिंदरपाल सिंह रूपराह ने छात्रों को समझाया कि अपराध होने पर कानून की मशीनरी कैसे काम करती है। इसमें प्रथम सूचना प्रतिवेदन दर्ज होने से लेकर गवाहों के बयान, क्राइम सीन मैपिंग, सबूत ज़ब्त करने, फॉरेंसिक जांच, बेल बॉन्ड, अपराधी के बयान, और अंततः न्यायाधीश व अभियोजन/बचाव वकीलों की भूमिकाओं तक का विस्तार से प्रशिक्षण दिया गया।
15 सितम्बर को कॉलेज कैंपस में चार काल्पनिक क्राइम सीन तैयार किए गए। छात्रों की टीमों को पुलिस और मीडिया की भूमिका निभाने को कहा गया। कहानी थी — एक साल से लापता रोहित दुबे का कंकाल मिलने और उनकी बेटी आशी की संदिग्ध मौत से खुलने वाले राज़। कहीं जिम ट्रेनर और पत्नी के अफेयर की डायरी, कहीं काले जादू की राख, तो कहीं फाइनेंशियल डॉक्यूमेंट्स और कॉल रिकॉर्ड्स — सबूत इकट्ठा कर छात्रों ने चालान तैयार किया। शिक्षकों ने फॉरेंसिक एक्सपर्ट बनकर मेडिकल, फॉरेनसिक और पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट तैयार की।
16 और 17 सितम्बर को कोर्टरूम बना क्लासरूम। छात्र प्रॉसिक्यूशन और डिफेन्स में बंटकर गवाह पेश करते, दस्तावेज़ एग्ज़िबिट करते और अंतिम बहस रखते दिखे। शिक्षकों ने जज की भूमिका में सिर्फ़ अंक दिए, ताकि छात्र बिना डर के सीख सकें।
18 और 19 सितम्बर को छात्र हाईकोर्ट की अपील पर मूट कोर्ट में बहस करेंगे। यानी ऍफ़.आई.आर. से लेकर ट्रायल और फिर अपीलीय अदालत तक – छात्रों को पूरे आपराधिक न्याय प्रक्रिया का अनुभव मिलेगा।
20 सितम्बर को यह शिक्षा सप्ताह एक मिनी-फेस्ट के साथ समाप्त होगा, जिसमें स्थानीय स्टॉल्स और सांस्कृतिक कार्यक्रमों से कैंपस गूंज उठेगा।
इस पहल ने छात्रों को न सिर्फ़ चार्जशीट पढ़ना सिखाया बल्कि उन्हें वह बढ़त दी जो कई युवा वकीलों को प्रैक्टिस में सालों बाद मिलती है। आयोजनकर्ता निधि कौर पदम रूपराह ने कहा,
“हमारा मकसद था कि छात्र किताबों से बाहर निकल कर व्यावहारिक रूप से समझें कि केस कैसे बनता है और कैसे लड़ा जाता है। यह उनके आत्मविश्वास और पेशेवर कौशल दोनों को मज़बूत करेगा।”



