जनेकृविवि के कृषि विज्ञान केन्द्रों की समीक्षा बैठक प्रारंभ

जबलपुर दर्पण। कृषिविश्वविद्यालय के संचालकविस्तारसेवायें एवंआई.सी.ए.आर. अटारी के संयुक्ततत्वाधानमें 2 दिवसीय समीक्षा बैठक का आयोजनदर्पणसभागारमेंआयोजित की गई।समीक्षा बैठक के मुख्यअतिथिडाॅ.प्रमोदकुमारमिश्रा ने कहाकिकृषिविज्ञानकेन्द्र, कृषितकनीकीविस्तार व नवाचारमंेमहत्वपूर्ण योगदानहै।हमारेवैज्ञानिकजिलास्तरपरअतिउल्लेखनीय कार्यकररहेहैं।विशिष्टअतिथिआई.सी.ए.आर. अटारी के निदेशकडाॅ.एस.आर.के. सिंह ने कहाकिकृषिविज्ञानकेन्द्रों के मेनडेट के अनुसारकार्योकोप्राथमिकता से करनाहोगा।स्वागतउद्बोधनसंचालकविस्तारसेवायें, डाॅ. दिनकरप्रसाद शर्मा ने कहाकिवर्षभर के कृषिविज्ञानकेन्द्र के कार्यो की विभिन्नसमस्याओं एवंसमाधानविषय परबातकही।समीक्षा बैठकमेंजवाहरलालनेहरू कृषिविश्वविद्यालय,जबलपुर के अंतर्गतसंचालित 26 कृषिविज्ञानकेन्द्रों के वरिष्टवैज्ञानिक एवंप्रमुख के अलावावैज्ञानिकों की उपस्थितिरही।इस दौरानकृषिविज्ञानकेन्द्र के कार्यो की जानकारीपीपीटी के माध्यम से प्रस्तुति, बजटकार्यो की विस्तार से जानकारीदीगई।समीक्षा बैठक के शुभारंभमेंनवनियुक्तनिदेशकआई.सी.ए.आर. अटारीडाॅ.एस.आर.के. सिंह का सभीवैज्ञानिकोंकी ओर से शाल,श्रीफल व स्मृतिचिन्ह सेस्वागतअभिनंदनभीकियागया।इस दौरानभारतीषकृषिअनुसंधानपरिषद, नईदिल्ली से प्राप्तआदिवासीउपपरियोजना के अंतर्गतविश्वविद्यालय एवं मध्यप्रदेश की प्रथम ‘‘ताजे एवंमीठेपानीमेंमोती का उत्पादन’’ के संबंध मेंकृषिविज्ञानकेन्द्रछिंदवाड़ाकी मोतीपरियोजनाप्रभारीडाॅ. चंचलभार्गव ने सम्पूर्णजानकारीपाॅवरपाइंट के माध्यम से प्रदानकी।इसकेबादडाॅ. चंचलभार्गव द्वारामोती की खेती के संबंध मेंस्वयंलिखितपुस्तक का विमोचनकुलपतिडाॅ. मिश्रा, अटारीनिदेशकडाॅ. एस.आर.के. सिंह सहितमंचासीनअधिष्ठाताकृषिसंकायडाॅ. धीरेन्द्र खरे, संचालकविस्तारसेवायेंडाॅ. दिनकरप्रसाद शर्मासहितअन्य द्वाराकियागया।समीक्षा बैठक के दौरानग्लिटराटीपर्लफार्मराजस्थान केफाउंडर एवंसीईओ एवंप्रमुख श्रीअचल सिंह द्वाराकृषिविज्ञानकेन्द्रछिंदवाड़ाकोआठलाख पच्चीसहजारपांचसौ रूपये की राशि का भीप्रदानकियागया।समीक्षा बैठक का संचालनवरिष्टवैज्ञानिकडाॅ. संजय वैश्याम्पन एवंआभारप्रदर्शनप्रमुख वैज्ञानिकडाॅ. टी.आर.शर्मा द्वाराकियागया।समीक्षा बैठकमेंउपकुलसचिचडाॅ. टी.आर. शर्मा, सूचना एवंजनसम्पर्कअधिकारीडाॅ. शेखर सिंह बघेल, डाॅ. यतिराज खरे, की उपस्थितिरही।इसकेसाथहीकार्यक्रमकोसफलबनानेमेंवैज्ञानिकडाॅ. प्रमोदकुमारगुप्ता, डाॅ. शशिगौर, डाॅ. दीपालीबाजपेई, श्रीमतिरजनीकोरीसहितअन्य की उल्लेखनीय भूमिकारही।



