प्रसव के दौरान महिला की मौत पर परिजनों का हंगामा

सीधी जबलपुर दर्पण । प्रसव के दौरान एक गर्भवती महिला की मौत पर आक्रोशित परिजनों एवं ग्रामीणों ने स्थानीय अस्पताल चौक पर शव रखकर चक्काजाम कर दिया। उन्होने डॉक्टरों पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए कार्रवाई की मांग की। बाद में एसडीएम के मौके पर पहुंचने और कार्रवाई के लिए तीन सदस्यीय टीम गठित कर निष्पक्ष जांच का आश्वासन देने के पश्चात चक्काजाम समाप्त हुआ। मिली जानकारी के अनुसार जिला मुख्यालय से करीब 15 किलोमीटर दूर चौफाल निवासी कल्पना भुजवा पति संजय भुजवा उम्र 30 वर्ष को प्रसव वेदना होने पर परिजर उप स्वास्थ्य केंद्र बंजारी ले गए। महिला ने वहां बच्चे को जन्म दिया। लेकिन इसके बाद उसकी तबियत बिगडऩे लगी। परिजनों का आरोप था कि डॉक्टर एवं स्वास्थ्य कर्मियों ने समय पर उचित उपचार नहीं किया। जिसके चलते प्रसूता की स्थिति गंभीर हो गई। बाद में महिला को जिला अस्पताल सीधी रेफर कर दिया गया। लेकिन अस्पताल पहुंचने के पहले ही उसकी मौत हो गई। जिला अस्पताल में डॉक्टरों ने परीक्षण के पश्चात महिला को मृत घोषित कर दिया। लिहाजा परिजनों का आक्रोश फूट पड़ा और उन्होने हंगामा शुरू कर दिया। परिजनों और ग्रामीणों ने आज दोपहर करीब 12 बजे अस्पताल तिराहा में महिला का शव रखकर चक्काजाम कर दिया। चक्काजाम की खबर मिलते ही काफी संख्या में पुलिस बल मौके पर पहुंच गया। पुलिस द्वारा आक्रोशित लोगों को समझाने का काफी प्रयास किया गया किंतु उनका कहना था कि जब तक लापरवाह डॉक्टर एंव स्वास्थ्य कर्मियों पर कार्रवाई नहीं होगी वह शव नहीं हटाएंगे। अंतत: गोपद बनास एसडीएम राकेश शुक्ला को सूचना मिलने पर वह मौके पर पहुंचे और उन्होने परिजनों से बातचीत कर उन्होने शांत कराया साथ ही इस घटना की जांच के लिए तीन सदस्यीय टीम का गठन किया। जिला अस्पताल स्थित अस्पताल चौकी में भी इस मामले में मर्ग कायम कर जांच शुरू कर दी है। एसडीएम के आश्वासन के पश्चात परिजनों एवं ग्रामीणों ने अस्पताल तिराहा में रखे गए शव को हटाया और आवागवन फिर से शुरू हो गया। इस मामले को लेकर परिजनों के साथ ही साथ में आए ग्रामीणों में भी काफी आक्रोश था। उनका स्पष्ट कहना था कि स्वास्थ्य केंद्र बंजारी में पदस्थ डॉक्टर और स्वास्थ्य कर्मी अपनी जिम्मेदारी के प्रति पूरी तरह से लापरवाह हैं।
जिला अस्पताल परिसर में लगी रही भीड़
प्रसव के बाद गंभीर हालत में जिला अस्पताल लेकर आए परिजनों को जब मालूम पड़ा कि कल्पना भुजवा की मौत हो गई है तो उनके द्वारा अपने आक्रोश को मुखर किया जाना शुरू कर दिया गया। जिसके चलते अस्पताल परिसर में लोगों की काफी भीड़ जमा हो गई। चर्चा के दौरान कुछ लोगों का कहना था कि कुछ समय से प्रसव के दौरान महिलाओं की हालत गंभीर होने या मौत होने की घटनाएं लगातार बढ़ रही है। ऐसा आभाष होता है कि प्रसव के लिए आने वाली महिलाओं की देखरेख तत्परता के साथ करने की जरूरत डॉक्टर नहीं समझते। सबकुछ नर्स के हवाले ही छोंड़ दिया जाता है। नर्सों का ध्यान भी ऐसी गरीब महिलाओं पर नहीं रहता जिनसे उनको न्योछावर के रूप में राशि मिलने की उम्मीद नहीं रहती। यह अवश्य है कि कुछ लोग प्रसव के लिए आने वाली महिला की जान बचाने के लिए पहले से ही नर्सों को भरपूर न्योछावर देने का आश्वासन दे देते हैं। जिसके बाद ऐसी महिलाओं की देखभाल प्राथमिकता से की जाती है। यदि परिजनों की ओर से नर्सों को अलग से नजराना देने की बात नहीं की जाती तो उनके द्वारा पूरी तरह से लापरवाही बरती जाती है। इसी लापरवाही के चलते ही प्रसव के दौरान महिलाओं की मौत हो जाती है। कई बार महिला की हालत गंभीर हो जाने के कारण उसे जल्द से जल्द बड़े अस्पताल के लिए रेफर करके अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ लिया जाता है।



